शिमला: हिमाचल प्रदेश के वाहन स्वामियों और आम जनता की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। प्रदेश विधानसभा ने राज्य में पेट्रोल और डीजल पर सेस (Cess) लगाने और उसकी दरों में वृद्धि करने से संबंधित एक महत्वपूर्ण विधेयक (Bill) को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्य में ईंधन की कीमतों में उछाल आना तय माना जा रहा है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राजस्व (Revenue) बढ़ाने और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। विधानसभा में पारित बिल के अनुसार, अब पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर की दर से अतिरिक्त सेस वसूला जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे होने वाली आय का उपयोग बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जाएगा।
जनता पर पड़ेगा सीधा असर
पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल में परिवहन की लागत पहले ही अधिक रहती है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से न केवल निजी वाहन चलाना महंगा होगा, बल्कि माल ढुलाई (Freight) की दरें बढ़ने से दैनिक उपयोग की वस्तुओं, फल और सब्जियों के दामों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
विपक्ष का कड़ा विरोध
विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं का बोझ आम जनता पर डाल रही है। उन्होंने तर्क दिया कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए यह फैसला 'जले पर नमक' छिड़कने जैसा है। सदन के भीतर इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
कब से लागू होंगी नई दरें?
विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होते ही नई दरें पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएंगी। पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी से पर्यटकों के बजट पर भी असर पड़ सकता है।
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