मेरठ: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रविवार को मेरठ के किदवई नगर पहुंचे। यहाँ उन्होंने पिछले दिनों एक मकान में लगी भीषण आग में जान गंवाने वाले कपड़ा कारोबारी आसिम के परिजनों से मुलाकात की। इस हृदयविदारक हादसे में एक ही परिवार के 6 लोगों (माँ और 5 बच्चे) की असमय मृत्यु हो गई थी। पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए सांसद ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की संप्रभुता को लेकर कड़ा रुख अपनाया।
पीड़ित परिवार के लिए 5 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग
चंद्रशेखर आजाद ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद कहा कि यह हादसा अत्यंत दुखद है, जिसने पूरे परिवार को उजाड़ कर रख दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवार का कारोबार पूरी तरह नष्ट हो चुका है, इसलिए उन्हें तत्काल 5 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। हालांकि, मुलाकात के दौरान भावुक परिवार ने स्वाभिमान दिखाते हुए आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया, लेकिन सांसद ने जोर देकर कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और पुनर्वास सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
अमेरिका-इजराइल को चेतावनी: "भारत की ओर आंख उठाई तो ईंट से ईंट बजा देंगे"
पीड़ितों से मिलने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए चंद्रशेखर आजाद का एक अलग रूप देखने को मिला। उन्होंने वैश्विक राजनीति और महाशक्तियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ देश 'सुपरपावर' बनने की होड़ में अपनी सीमाओं को भूल रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अमेरिकी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर किसी भी विदेशी ताकत ने भारत की तरफ आंख उठाकर देखने की जुर्रत की, तो यह नया भारत है, हम ईंट से ईंट बजा देंगे।" उन्होंने याद दिलाया कि भारत की मिट्टी ने अंग्रेजों को खदेड़ा था और देश की संप्रभुता के मुद्दे पर पूरी दुनिया को भारतीय एकता का सम्मान करना होगा।
आंतरिक सुरक्षा और आईआईएमटी प्रकरण पर जताई चिंता
सांसद ने न केवल बाहरी खतरों बल्कि देश के भीतर हो रही घटनाओं पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मेरठ के आईआईएमटी विश्वविद्यालय में एक मुस्लिम छात्र के साथ हुई मारपीट की घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में इस तरह का भेदभाव और हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निष्कर्ष
चंद्रशेखर आजाद का यह दौरा न केवल एक सांत्वना भेंट थी, बल्कि इसके जरिए उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक अपनी बेबाक राय साझा की। उनके इस रुख से स्पष्ट है कि वे न केवल दलितों और वंचितों की आवाज उठा रहे हैं, बल्कि राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भी मुखर होकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
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