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जासूसी के आरोप में बंद चीनी महिला एलिस ली को मिली जमानत, ढाई साल बाद जेल से आएगी बाहर

 


मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला जेल में पिछले ढाई साल से बंद चीनी महिला एलिस ली (Alice Lee) के लिए राहत भरी खबर आई है। जासूसी और अवैध रूप से भारत में रहने के गंभीर आरोपों का सामना कर रही एलिस ली को अदालत ने जमानत दे दी है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब वह जेल की सलाखों से बाहर आ सकेगी। हालांकि, जमानत के साथ उन पर कई कड़ी शर्तें भी लागू की गई हैं।

फर्जी पहचान और जासूसी के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

चीनी नागरिक एलिस ली को जुलाई 2022 में मेरठ के पल्लवपुरम इलाके से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रही थी और उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए भारतीय नाम 'डॉ. पिंकी' का इस्तेमाल किया था। उस पर आरोप था कि वह प्रतिबंधित क्षेत्रों की रेकी कर रही थी और महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा करने की संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त थी। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए उसे दबोचा था।

ढाई साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली राहत

एलिस ली के वकील ने अदालत में दलील दी कि वह लंबे समय से जेल में है और मामले की सुनवाई में समय लग रहा है। बचाव पक्ष ने मानवाधिकारों और जेल में बिताई गई अवधि का हवाला देते हुए जमानत की अर्जी दाखिल की थी। मेरठ की विशेष अदालत ने मामले के तथ्यों और अब तक की जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत का अर्थ आरोपों से मुक्ति नहीं है और मुकदमा अपनी गति से चलता रहेगा।

जमानत की शर्तें और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी

अदालत ने एलिस ली को जमानत देते समय स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह बिना अनुमति के भारत नहीं छोड़ सकती। उसका पासपोर्ट पहले से ही जांच एजेंसियों के पास जमा है। इसके अलावा, उसे स्थानीय पुलिस थाने में नियमित हाजिरी लगानी होगी और अपनी लोकेशन के बारे में प्रशासन को अपडेट रखना होगा। खुफिया एजेंसियां अभी भी उसके संपर्कों और भारत में उसके रुकने के असली मकसद की गहराई से जांच कर रही हैं।

विदेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ पर बढ़ी चौकसी

एलिस ली का मामला सामने आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विदेशी नागरिकों, विशेषकर चीनी नागरिकों की अवैध मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क हो गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली-एनसीआर और मेरठ के आसपास कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ विदेशी नागरिकों ने फर्जी पहचान पत्र बनवाकर रहने की कोशिश की है। पुलिस अब मकान मालिकों को भी किरायेदार का सत्यापन अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दे रही है।

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