नमो भारत ट्रेन का कमाल
नई दिल्ली/गाजियाबाद: दिल्ली से मेरठ के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए 'नमो भारत' ट्रेन एक वरदान साबित हो रही है। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के साहिबाबाद से मोदीनगर उत्तर तक के कॉरिडोर के चालू होने के बाद से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) पर निजी वाहनों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से जूझने वाले इस रूट पर अब सफर पहले के मुकाबले काफी सुगम हो गया है।
निजी वाहनों को छोड़ ट्रेन चुन रहे हैं यात्री
हालिया आंकड़ों और फीडबैक के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग जो पहले अपनी कार या बाइक से दिल्ली-एनसीआर के बीच यात्रा करते थे, अब नमो भारत ट्रेन को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण ट्रेन की रफ्तार, समय की पाबंदी और आरामदायक सफर है। एक्सप्रेसवे पर अक्सर लगने वाले लंबे जाम और टोल की भारी कीमतों से बचने के लिए मध्यम वर्ग और कामकाजी पेशेवर इस हाई-स्पीड ट्रेन को अपना रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण और समय की बचत
नमो भारत ट्रेन के चलने से न केवल सड़क पर भीड़ कम हुई है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या कम होने से ईंधन की खपत घटी है। जहाँ एक्सप्रेसवे पर पीक ऑवर्स के दौरान साहिबाबाद से मेरठ की दूरी तय करने में काफी समय लगता था, वहीं नमो भारत इसे मात्र कुछ मिनटों में पूरा कर रही है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जाम से मुक्ति
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे भारत के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। विशेष रूप से गाजियाबाद, मुरादनगर और मोदीनगर के इलाकों में एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव बहुत अधिक रहता था। नमो भारत के विस्तार के बाद इन इलाकों के स्थानीय निवासियों ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि अब लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग सार्वजनिक परिवहन के इस आधुनिक साधन का उपयोग कर रहे हैं।
भविष्य में कनेक्टिविटी होगी और भी मजबूत
वर्तमान में नमो भारत का एक हिस्सा संचालित है, लेकिन जैसे ही यह पूरा कॉरिडोर (सराय काले खां से मेरठ) पूरी तरह चालू होगा, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर दबाव और भी कम हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण संचालन के बाद एक्सप्रेसवे पर चलने वाली करीब 20-25% निजी गाड़ियाँ सड़कों से हट सकती हैं, जो परिवहन व्यवस्था के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव होगा।
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