Looking For Anything Specific?

एक हाथ ले, दूजे हाथ दे ; ईरान ने भारत के सामने रखी शर्त


होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: 
जब्त टैंकर छोड़ने की मांग

नई दिल्ली/तेहरान: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी के बीच ईरान और भारत के कूटनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ गया है। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने भारतीय अधिकारियों के सामने एक सख्त शर्त रखी है। ईरान का कहना है कि यदि भारत चाहता है कि उसके व्यापारिक जहाजों को होर्मुज के रास्ते सुरक्षित निकलने दिया जाए, तो भारत को पहले उसके जब्त किए गए तेल टैंकर को रिहा करना होगा।

क्या है पूरा विवाद?

यह संकट तब शुरू हुआ जब भारतीय नौसेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों या तकनीकी नियमों के उल्लंघन के संदेह में ईरान से संबंधित एक तेल टैंकर को भारतीय समुद्री क्षेत्र में जब्त कर लिया था। अब ईरान ने इस कार्रवाई को 'अनुचित' बताते हुए भारत पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सामरिक अहमियत

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोक पॉइंट' (Choke Point) है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20-30% हिस्सा गुजरता है। ईरान का इस जलमार्ग पर भौगोलिक नियंत्रण है।

  • भारत पर प्रभाव: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल) का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है।

  • ईरान की चेतावनी: ईरान ने संकेत दिया है कि जब तक उसका टैंकर नहीं छोड़ा जाता, तब तक वह भारतीय जहाजों के आवागमन में 'सहयोग' नहीं करेगा।

भारत की कूटनीतिक दुविधा

भारत इस समय दोतरफा दबाव में है:

  1. ऊर्जा सुरक्षा: खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज का रास्ता खुला रहना अनिवार्य है।

  2. अमेरिका और इजरायल का दबाव: अमेरिका और इजरायल चाहते हैं कि भारत ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए और प्रतिबंधों का पालन करे।

भारत सरकार का रुख

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि टैंकर को कानूनी प्रक्रिया के तहत रोका गया है और इसका किसी कूटनीतिक सौदेबाजी से संबंध नहीं होना चाहिए। हालांकि, समुद्र में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा और तेल की कीमतों में उछाल को देखते हुए भारत को जल्द ही कोई मध्य मार्ग निकालना पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों पर असर

इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़नी शुरू हो गई हैं। अगर ईरान होर्मुज के रास्ते को पूरी तरह बाधित करता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ