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मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति से मेरठ, अलीगढ़ और सहारनपुर में भाजपा का पलड़ा भारी


मेरठ/अलीगढ़: उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नगर निगमों में मनोनीत पार्षदों (Nominated Councillors) की सूची जारी होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। मेरठ, अलीगढ़, सहारनपुर और फिरोजाबाद जैसे महत्वपूर्ण नगर निगमों में भाजपा समर्थित कार्यकर्ताओं को मनोनीत सदस्य के रूप में जगह मिलने से नगर निकाय बोर्ड में सत्ताधारी दल की स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है।

बोर्ड की गणित में भाजपा को बढ़त

नगर निगमों में निर्वाचित पार्षदों के साथ-साथ शासन द्वारा मनोनीत सदस्यों की भी अहम भूमिका होती है। इन नियुक्तियों के बाद मेरठ और आसपास के जिलों के नगर निकायों में समीकरण बदल गए हैं:

  • वोटिंग का अधिकार: हालांकि मनोनीत पार्षद महापौर (Mayor) के चुनाव में वोट नहीं डाल सकते, लेकिन बोर्ड की सामान्य बैठकों और विकास कार्यों के प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान उनका हस्तक्षेप निर्णायक होता है।

  • कार्यकर्ताओं का सम्मान: लंबे समय से पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को इन पदों पर नियुक्त कर भाजपा ने आगामी चुनावों से पहले अपने कैडर को उत्साहित किया है।

मेरठ में जश्न का माहौल

मेरठ नगर निगम के लिए मनोनीत सदस्यों की सूची आते ही भाजपा कार्यालय पर आतिशबाजी और मिठाई बांटने का सिलसिला शुरू हो गया। नवनियुक्त सदस्यों ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे शहर के विकास और जनसमस्याओं को बोर्ड की बैठक में मजबूती से उठाएंगे।

अलीगढ़ और सहारनपुर में भी नियुक्तियां

  • अलीगढ़: यहाँ भी स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को मनोनयन मिला है। इससे नगर निगम के भीतर विपक्षी पार्षदों की घेराबंदी करने में भाजपा को आसानी होगी।

  • सहारनपुर और फिरोजाबाद: इन दोनों निगमों में भी शासन ने अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता दी है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पार्षदों के अनुभव का लाभ मिल सके।

विपक्ष की चिंताएं

विपक्षी दलों (सपा, बसपा और कांग्रेस) ने इन नियुक्तियों पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल अपने चहेतों को उपकृत कर रही है। उनका तर्क है कि मनोनीत सदस्यों की संख्या बढ़ने से बोर्ड में लोकतांत्रिक चर्चा के बजाय सत्ता का दबदबा अधिक रहेगा।

विकास कार्यों को मिलेगी गति

नगर आयुक्तों और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि पूर्ण बोर्ड (निर्वाचित + मनोनीत) होने से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। वार्ड स्तर पर लंबित पड़ी फाइलों और बजट आवंटन की प्रक्रिया को अब गति मिलने की उम्मीद है।

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