तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर एक चौंकाने वाली और अभूतपूर्व घोषणा की है। अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित युद्ध के खतरों के बीच, ईरान ने एलान किया है कि वह अब इस जलमार्ग से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से टोल टैक्स के रूप में नकद राशि स्वीकार नहीं करेगा। इसके बजाय, अब भुगतान केवल क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) में ही लिया जाएगा।
वैश्विक शिपिंग के लिए नया 'क्रिप्टो' नियम
ईरान के इस कदम को वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी डॉलर की प्रभुसत्ता पर एक बड़े हमले के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है योजना: ईरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले प्रत्येक व्यापारिक जहाज और टैंकर को अब 'ट्रांजिट फीस' या 'टोल' चुकाने के लिए डिजिटल मुद्रा का उपयोग करना होगा।
डॉलर को दरकिनार करने की कोशिश: विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली और प्रतिबंधों (Sanctions) से बचा जा सके, क्योंकि क्रिप्टो लेनदेन को ट्रैक करना कठिन होता है।
अमेरिका और इजरायल की 'युद्ध विराम' चर्चा के बीच फैसला
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और इजरायल के बीच संभावित युद्ध विराम (Ceasefire) की चर्चाएं तेज हो रही थीं।
ईरान का सख्त संदेश: इस फैसले के जरिए ईरान ने संदेश दिया है कि वह अमेरिका के आर्थिक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
ऊर्जा संकट का खतरा: यदि जहाज इस नई भुगतान पद्धति को नहीं अपनाते हैं, तो ईरान उन्हें जलमार्ग से गुजरने से रोक सकता है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है।
क्रिप्टोकरेंसी का चयन क्यों?
ईरान पिछले काफी समय से अपनी अर्थव्यवस्था को 'डी-डॉलराइज' (De-dollarize) करने की कोशिश कर रहा है।
प्रतिबंधों की काट: क्रिप्टोकरेंसी के जरिए व्यापार करने से ईरान सीधे तौर पर उन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बायपास कर सकेगा जो उसे वैश्विक व्यापार प्रणाली से काटते हैं।
डिजिटल संप्रभुता: ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह उनकी संप्रभुता की रक्षा करने और क्षेत्र में अमेरिकी आर्थिक 'ब्लैकमेल' को रोकने के लिए उठाया गया कदम है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चिंता
दुनिया भर के शिपिंग संगठनों और समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस पर चिंता व्यक्त की है:
वैधानिक चुनौती: कई देशों के लिए क्रिप्टोकरेंसी में टोल टैक्स चुकाना कानूनी रूप से जटिल हो सकता है क्योंकि वहां डिजिटल मुद्राएं पूरी तरह विनियमित (Regulate) नहीं हैं।
समुद्री डकैती की आशंका: कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि इस तरह के अनिवार्य शुल्क को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत 'अवैध वसूली' के रूप में देखा जा सकता है, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।
ईरान का यह 'फुल प्लान' वैश्विक समुद्री व्यापार के भविष्य को पूरी तरह से बदल सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका इस डिजिटल चुनौती का जवाब सैन्य कार्रवाई से देगा या कूटनीति से।
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