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सेंट्रल मार्केट में 'बुलडोजर' का एक्शन; दुकानों के बाद अब आशियानों पर मंडराया संकट, सहमे परिवार

 

मेरठ: महानगर के व्यस्ततम व्यापारिक केंद्र सेंट्रल मार्केट (Central Market) में प्रशासन की हालिया कार्रवाई ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। अवैध अतिक्रमण और मानचित्र के विपरीत किए गए निर्माणों के खिलाफ प्रशासन का 'बुलडोजर' गरजने के बाद अब वहां रहने वाले परिवारों की रातें काली हो गई हैं। दुकानों के ध्वस्तीकरण के बाद अब डर इस बात का है कि प्रशासन आवासीय हिस्सों पर भी कार्रवाई कर सकता है।

दुकानों पर चला बुलडोजर, मची अफरा-तफरी

प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल के साथ सेंट्रल मार्केट पहुंची और उन निर्माणों को ढहाना शुरू किया जो सार्वजनिक भूमि या पार्किंग एरिया में किए गए थे।

  • अचानक हुई कार्रवाई: व्यापारियों का आरोप है कि उन्हें अपना सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। देखते ही देखते कई सालों पुरानी दुकानें मलबे में तब्दील हो गईं।

  • व्यापारिक नुकसान: इस कार्रवाई से करोड़ों रुपये के व्यापारिक नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। कई दुकानदारों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि उनकी पूरी जमा-पूंजी इन दुकानों में लगी थी।

अब घर बचाने की चिंता में डूबे लोग

सेंट्रल मार्केट के कई हिस्सों में दुकानों के ऊपर या ठीक पीछे रिहायशी मकान बने हुए हैं।

  1. सुरक्षा का डर: बुलडोजर की कार्रवाई से कई मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं, जिससे लोगों को घर गिरने का डर सता रहा है।

  2. नोटिस का खौफ: प्रशासन ने कुछ और संपत्तियों को चिन्हित किया है, जिसके बाद परिवारों को डर है कि उनका सिर छिपाने का ठिकाना (आशियाना) भी छीना जा सकता है।

  3. बुजुर्ग और बच्चे परेशान: कार्रवाई के दौरान मची अफरा-तफरी और धूल-मिट्टी के बीच घर के बुजुर्ग और बच्चे दहशत में हैं। कई परिवारों ने डर के मारे अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया है।

प्रशासन का तर्क: "मास्टर प्लान का पालन जरूरी"

नगर निगम और मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर को व्यवस्थित करने के लिए है।

  • अतिक्रमण मुक्त सड़क: अधिकारियों के अनुसार, सेंट्रल मार्केट में अतिक्रमण के कारण जाम की समस्या विकराल हो गई थी, जिसे हटाना जनहित में अनिवार्य है।

  • अवैध मानचित्र: जिन इमारतों को ढाया गया है, वे स्वीकृत मानचित्र (Map) के दायरे से बाहर थीं या उनका व्यावसायिक उपयोग बिना अनुमति के किया जा रहा था।

जनप्रतिनिधियों ने जताया विरोध

स्थानीय पार्षदों और व्यापारी नेताओं ने इस कार्रवाई को 'अमानवीय' करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि त्योहारों और शादियों के सीजन को देखते हुए प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और रिहायशी इलाकों को इस कार्रवाई से दूर रखना चाहिए।

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