मेरठ: जनपद के चौपला (Chaupla) गांव में शुक्रवार को अचानक लगी भीषण आग से अफरा-तफरी मच गई। आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के घरों और संपत्तियों पर खतरा मंडराने लगा। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों की सूझबूझ और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
कैसे भड़की आग?
जानकारी के अनुसार, आग लगने की शुरुआत गांव के बाहरी हिस्से में स्थित एक घेरे (पशुओं के बाड़े) या कूड़े के ढेर से हुई।
तेज हवाओं का असर: गर्मी और तेज हवाओं के कारण चिंगारी ने तेजी से सूखी घास और लकड़ी के गट्ठरों को अपनी चपेट में ले लिया।
धुएं का गुबार: आसमान में काले धुएं का गुबार उठते देख ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकल आए और शोर मचाना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों और पुलिस का साझा मोर्चा
आग की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड को सूचित करने के साथ ही पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर राहत कार्य शुरू किया।
मानव श्रृंखला बनाई: फायर ब्रिगेड के पहुंचने का इंतजार किए बिना ग्रामीणों ने बाल्टियों और नलों से पानी डालना शुरू किया। युवाओं ने हैंडपंप और नलकूपों से पानी की व्यवस्था की।
पुलिस की मदद: मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने न केवल भीड़ को नियंत्रित किया बल्कि खुद भी आग बुझाने में हाथ बंटाया।
कड़ी मशक्कत: करीब एक-दो घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग की लपटों को फैलने से रोका जा सका और अंततः उस पर काबू पा लिया गया।
नुकसान का आकलन
गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई और समय रहते आग पर काबू पा लेने से रिहायशी मकानों को नुकसान नहीं पहुंचा। हालांकि, बाड़े में रखी घास, उपले और कुछ कृषि उपकरण जलकर खाक हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि थोड़ी भी देर होती, तो आग पूरे मोहल्ले को चपेट में ले सकती थी।
प्रशासन की अपील
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे गर्मी के मौसम में ज्वलनशील पदार्थों के पास सावधानी बरतें।
सतर्कता: बीड़ी-सिगरेट के टुकड़े या जलती हुई तीली कहीं भी न फेंकें।
तैयारी: बाड़ों या घरों के पास पानी की व्यवस्था रखें ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
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