देश में जारी ऊर्जा संकट, थोक महंगाई दर में उछाल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाला दावा तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट्स और संदेशों में दावा किया जा रहा है कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों से "एक बड़ा संकट आने का हवाला देते हुए एक वक्त का भोजन छोड़ने (उपवास रखने)" की अपील की है।
इस संवेदनशील और गंभीर दावे के वायरल होते ही सरकारी तंत्र तुरंत एक्शन में आ गया और PIB Fact Check (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) ने इस पूरे मामले की पड़ताल कर सच्चाई सामने रखी है।
क्या है वायरल पोस्ट में?
विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक कथित समाचार की क्लिपिंग और टेक्स्ट मैसेज शेयर किया जा रहा है। इसमें लिखा है:
"देश पर आए बड़े आर्थिक और ईंधन संकट को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने जनता से अपील की है कि वे देश हित में दिन में केवल एक वक्त का ही भोजन करें, ताकि संसाधनों को बचाया जा सके।"
इस दावे को हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन का सीमित उपयोग करने की अपील से जोड़कर देखा जा रहा था, जिससे आम जनता के बीच भ्रम और घबराहट की स्थिति पैदा होने लगी।
PIB Fact Check में क्या निकला सच?
भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक एजेंसी 'PIB Fact Check' ने इस दावे की गहनता से जांच की और इसे पूरी तरह से फर्जी (Fake) और भ्रामक करार दिया है।
पूरी तरह फर्जी दावा: PIB ने साफ किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की जनता से ऐसा कोई भी अनुरोध या 'एक वक्त का खाना छोड़ने' जैसी कोई अपील नहीं की है।
भ्रम फैलाने की साजिश: एजेंसी के अनुसार, सोशल मीडिया पर चल रहा यह संदेश पूरी तरह मनगढ़ंत है और इसका उद्देश्य देश में मौजूदा महंगाई और वैश्विक तनाव के माहौल के बीच आम नागरिकों में डर और असमंजस पैदा करना है।
सच्चाई क्या है?: सरकार ने ऐसी किसी भी खाद्यान्न या राशन की कमी से साफ इनकार किया है। देश का बफर स्टॉक पूरी तरह सुरक्षित है और ऐसी कोई स्थिति नहीं है जहां नागरिकों को भोजन छोड़ने की आवश्यकता पड़े।
सरकार की जनता से अपील
PIB Fact Check ने नागरिकों से सचेत रहने का आग्रह किया है:
सोशल मीडिया पर बिना किसी आधिकारिक स्रोत या पुष्टि के आने वाले ऐसे किसी भी भ्रामक और संवेदनशील संदेश पर विश्वास न करें।
इस तरह के फर्जी संदेशों और पोस्ट्स को आगे फॉरवर्ड या शेयर करने से बचें, क्योंकि यह कानूनन अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
किसी भी सरकारी योजना या बयान की प्रामाणिकता जांचने के लिए केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स या पीआईबी के हैंडल्स पर ही भरोसा करें।
0 टिप्पणियाँ