अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जारी भारी उछाल के बीच सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आखिरकार 15 मई (शुक्रवार) को देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। करीब चार साल (अप्रैल 2022 के बाद) में यह पहली बार है जब ईंधन के खुदरा दामों में बढ़ोतरी की गई है।
इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल का रेट ₹97.77 और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पर पहुंच गया है, वहीं मुंबई में पेट्रोल ₹106.64 और डीजल ₹93.14 प्रति लीटर बिक रहा है।
क्या ₹3 बढ़ने से संकट टल गया?
जानकारों और आधिकारिक सूत्रों की मानें तो यह ₹3 की बढ़ोतरी 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसी है।
तेल कंपनियों का भारी नुकसान: इस बढ़ोतरी से पहले तक तेल कंपनियां पेट्रोल पर ₹14 प्रति लीटर, डीजल पर ₹42 प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडर पर ₹674 का भारी घाटा उठा रही थीं।
दैनिक घाटा: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया था कि तेल कंपनियां रोजाना करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान उठाकर लंबे समय तक बाजार में ईंधन नहीं बेच सकती हैं। सरकार को किसी न किसी स्तर पर कड़ा फैसला लेना ही था।
क्यों बढ़ीं कीमतें? (मुख्य कारण)
ईरान-इजराइल संघर्ष: 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले और उसके बाद उपजे भू-राजनीतिक तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तेल आपूर्ति बाधित हुई है। इस रूट से दुनिया के कुल तेल-गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है।
$100 के पार कच्चा तेल: इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक समय $120 प्रति बैरल के पार चली गई थी, जो अब भी $104-$110 के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
दुनिया के मुकाबले भारत में अब भी कम असर
वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में कीमतों पर नियंत्रण रखने की कोशिश की गई है:
| देश | पेट्रोल में बढ़ोतरी | डीजल में बढ़ोतरी |
| भारत | +3.2% | +3.4% |
| पाकिस्तान | +54.9% | +44.9% |
| मलेशिया | +56.3% | +71.2% |
| यूएई | +52.4% | +86.1% |
| अमेरिका | +44.5% | +48.1% |
क्या आगे और महंगी होंगी कीमतें?
हां, इसकी पूरी आशंका है। यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दाम $100 प्रति बैरल से नीचे नहीं आते हैं, तो तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम ₹10 से ₹15 तक और बढ़ सकते हैं। हाल ही में थोक महंगाई दर (WPI) के 8.3% पर पहुंचने के बाद इस बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई (CPI) और आम जनता के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में जनता से अपील की है कि वे ईंधन का सीमित उपयोग करें, सार्वजनिक वाहनों का अधिक इस्तेमाल करें और जहां संभव हो 'वर्क फ्रॉम होम' को प्राथमिकता दें।
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