उत्तर प्रदेश पुलिस और विशेष रूप से एसटीएफ (STF) के लिए एक अत्यंत गौरव और गर्व का क्षण सामने आया है। शामली जिले में कुख्यात अपराधियों के साथ हुई एक खतरनाक मुठभेड़ के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले यूपी एसटीएफ के जांबाज इंस्पेक्टर स्वर्गीय सुनील कुमार को मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'कीर्ति चक्र' (Kirti Chakra) से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही वे यूपी पुलिस और एसटीएफ के पहले ऐसे कर्मी बन गए हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है।
शामली मुठभेड़ में दिखाया था अदम्य साहस
इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने जनवरी 2025 में शामली जिले के झिंझाना इलाके में अपराधियों के खिलाफ चलाए गए एक अभियान का नेतृत्व किया था। 20 जनवरी 2025 की रात को एसटीएफ की मेरठ यूनिट को सूचना मिली थी कि मुकीम काला गैंग का एक लाख रुपये का इनामी कुख्यात बदमाश अपने साथियों के साथ किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने जा रहा है।
सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने अपनी टीम के साथ मोर्चा संभाला। बदमाशों की ओर से की गई अंधाधुंध फायरिंग के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने और उनकी टीम ने हार नहीं मानी और जवाबी कार्रवाई में एक लाख के इनामी बदमाश सहित चार अपराधियों को ढेर कर दिया। इस मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हुए इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने इलाज के दौरान 22 जनवरी 2025 को अस्पताल में अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया था।
यूपी पुलिस के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज शहादत
मेरठ के रहने वाले सुनील कुमार ने करीब दो दशकों तक यूपी पुलिस और एसटीएफ में सेवा दी थी। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई कुख्यात अपराधियों और डकैतों के सफाए में अहम भूमिका निभाई थी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उनके इस अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को देश और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नमन करते हुए 'कीर्ति चक्र' दिए जाने का ऐलान किया गया है, जिससे पूरे पुलिस विभाग और उनके पैतृक क्षेत्र में सम्मान की लहर दौड़ गई है।
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