- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरधना के सलावा में बन रहे खेल विश्वविद्यालय का किया निरीक्षण
- 12 खेलों से जुड़े खेल पाठ्यक्रम, डिप्लोमा, डिग्री, पीजी और शोध पाठ्यक्रम होंगे शुरू
मेरठ | प्रदेश के युवाओं की खेल प्रतिभा को निखारने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मेरठ स्थित सरधना के सलावा में स्थापित प्रदेश का पहला ‘राज्य खेल विश्वविद्यालय’ अब विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा। गुरुवार को यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने खेल विवि का लोगो, ध्वज (फ्लैग) और यूनिफॉर्म भी लॉन्च की। उन्होंने कहा कि मेरठ का मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय देश-दुनिया में नया अध्याय लिखेगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि खेल विश्वविद्यालय में न केवल उच्चस्तरीय फैकल्टी की तैनाती होगी, बल्कि पूर्व खिलाड़ियों को भी बतौर कोच नियुक्त किया जाएगा। इससे युवा खिलाड़ियों को अनुभवी दिग्गजों के मार्गदर्शन में अपनी तकनीक सुधारने का मौका मिलेगा। खेल विश्वविद्यालय के निरीक्षण के बाद प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना होगी, जो मेरठ के खेल विश्वविद्यालय से संबद्ध होगा। विश्वविद्यालय में खेल से जुड़े 12 विषयों में डिप्लोमा, डिग्री, पीजी और शोध पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिसमें छह परंपरागत खेलों से जुड़े होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि खेलों को प्रोत्साहित करने वाली निजी खेल एकेडमियों को भी सरकार हरसंभव मदद देगी। करीब एक घंटे तक खेल विश्वविद्यालय परिसर में निरीक्षण, बैठक और मीडिया से बात कर मुख्यमंत्री देवबंद के लिए रवाना हो गए।
खेल विवि को वेस्ट यूपी का गौरव बताया
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी पहले से ही मेडल जीतकर देश का मान बढ़ा रहे हैं। अब यह खेल विश्वविद्यालय उन्हें और अधिक सशक्त बनाएगा। यह वेस्ट यूपी का गौरव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विश्वविद्यालय प्रदेश के युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संस्थान के माध्यम से यूपी के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकेंगे।
विश्वस्तरीय भविष्य का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने विवि प्रशासन को अभी से लक्ष्य निर्धारित कर काम करने को कहा है ताकि भारत की खेल सामर्थ्य को दुनिया के सामने मजबूती से रखा जा सके। यह विश्वविद्यालय न केवल एक शिक्षण संस्थान होगा, बल्कि युवाओं के लिए एक बड़े प्लेटफॉर्म के रूप में मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर बना यह विश्वविद्यालय ‘विकसित भारत’ के संकल्प के अनुरूप खेल संस्कृति को विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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