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जयंती विशेष: मेरठ का घंटाघर है नेताजी सुभाष के आगमन और भाषणों का साक्षी


- नेताजी ने टाउन हॉल पर सभा में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ भरा था युवाओं में जोश 

- रेलवे स्टेशन पर छात्रों समेत भारी संख्या में लोगों ने किया नेताजी का स्वागत

मेरठ | नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज जयंती मनाई जाएगी। नेताजी ने देश में ब्रिटिश साम्राज्य के के खिलाफ युवाओं में जिस तरह जोश भरा था, वह क्रांतिधरा पर भी देखने को मिला था। 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद नेताजी मेरठ आए और घंटाघर क्षेत्र में टाउनहॉल पर उन्होंने जनसभा भी की। उन्हें सुनने के लिए मेरठ ही नहीं आसपास के क्षेत्रों के लोग यहां पहुंचे थे।

आजादी की लड़ाई के दौरान 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस के कुछ पदाधिकारी भी पार्टी से अलग होने लगे थे। जैसे ही लोगों को पता चला कि नेताजी मेरठ आ रहे हैं तो उनके स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी गईं। नेताजी जब यहां आए तो रेलवे स्टेशन पर उनके स्वागत में हजारों की भीड़ एकत्र हुई थी। इतिहासकार डॉ. केके शर्मा, डॉ. देवेश शर्मा, डॉ. नवीन चंद गुप्ता कहते हैं कि मेरठ कालेज के काफी संख्या में छात्र भी स्वागत में यहां पहुंचे थे। नेताजी को सजी-धजी बग्गी में ढोल-नगाड़ों के साथ टाउन हॉल में लाया गया था। उन्होंने यहां हजारों की भीड़ को संबोधित करके आजादी के लिए लड़ने का आह्वान किया था। 


कहा- ब्रिटिश साम्राज्य की समाप्ति की घंटी बज गई

लोगों को संबोधित करते हुए उस समय घंटाघर की घंटी बजी तो नेताजी ने कहा कि ब्रिटिश साम्राज्य की समाप्ति की घंटी बज गई है और ज्यादा समय नहीं लगेगा आजादी मिलने में। लोगों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इस बात पर जमकर तालियां बजाईं और युवाओं ने नेताजी की जयकार की। 


नेताजी के नाम पर है द्वार और सभागार

नेताजी मेरठ आए और घंटाघर (टाउन हॉल) पर जनसभा की थी। यहां उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के अंत की घंटी बजने की बात कही थी। मेरठ ‘जय हिंद’ नारे से जुड़ा हुआ है, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मेरठ से निकला था और जिसे नेताजी ने लोकप्रिय बनाया। मेरठ के घंटाघर का एक द्वार नेताजी के नाम पर है, जो उनके यहां आने की याद दिलाता है। सीसीएसयू परिसर स्थित सभागार का नाम भी नेताजी के नाम पर है।

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