- मुजफ्फरनगर और दिल्ली समेत कई जगह पर दर्ज हैं आरोपियों पर मुकदमे, दिल्ली निवासी जाहिद को एसटीएफ की मेरठ यूनिट ने किया गिरफ्तार
मेरठ | सैकड़ों फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों की जीएसटी चोरी करने के मामले में यूपी एसटीएफ की मेरठ यूनिट ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पकड़ा आरोपी अपने बैंक खातों को इस गिरोह को किराये पर देता था। वहीं, गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश में एसटीएफ की टीम ने राजस्थान और दिल्ली में घेराबंदी कर दी है। इस गिरोह के खिलाफ मुजफ्फरनगर, दिल्ली और राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में मुकदमे दर्ज हैं। गिरोह के सरगना समेत पांच आरोपियों को पूर्व में एसटीएफ ने बेंगलुरू से पिछले साल जून में गिरफ्तार किया था।
मुजफ्फरनगर के खतौली थाना क्षेत्र के गांव वडसू निवासी अश्वनी कुमार ने थाने में मुकदमा अपराध संख्या 26/2024 दो साल पहले दर्ज कराया था। बताया था कि उसे नौकरी लगवाने के नाम पर कुछ लोगों ने ऑनलाइन संपर्क किया और आधार कार्ड, पैनकार्ड, बिजली का बिल समेत कुछ दस्तावेज व्हाट्सएप पर मंगवाए थे। इसके बाद इन दस्तावेज का इस्तेमाल कर एक फर्जी फर्म एके ट्रेडर्स बनाकर करीब 248 करोड़ रुपये के बिल बिना किसी लेनदेन के बनाए, साथ ही 45 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की। अश्वनी को उस समय जानकारी लगी, जब जांच के दौरान जीएसटी अधिकारियों और इनकम टैक्स विभाग की ओर से अश्वनी के दस्तावेज के आधार पर नोटिस दिया गया।
एसटीएफ को मिली थी जांच, तब हुआ नेटवर्क का खुलासा
प्रदेशभर में जीएसटी संबंधित तमाम मामलों में एसटीएफ को कार्रवाई के लिए लगाया गया है। अश्वनी के मुकदमे में जांच एसपी एसटीएफ ब्रिजेश सिंह को दी गई थी। एसटीएफ ने इसी मामले में दिल्ली के वजीराबाद जगतपुर निवासी जाहिद को गिरफ्तार कर लिया। जाहिद के साथ काम करने वाले मुख्य आरोपी रतनाराम, ओमप्रकाश, अनुमान राम निवासीगण बाडमेर राजस्थान और बुद्धराम, संतोष निवासी डाबड गुडामलानी बाडमेर राजस्थान को 28 जून 2025 को एसटीएफ की मेरठ यूनिट ने ही बेंगलुरू से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। यह गिरोह अभी तक 100 से ज्यादा फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी कर चुका है। जाहिद तभी से वांटेड था और अब गिरफ्तार किया गया है।
ऐसे करते थे वारदात
एसपी एसटीएफ ब्रिजेश सिंह ने बताया कि यह गिरोह लोगों के दस्तावेज लेकर इनके माध्यम से फर्जी फर्म रजिस्टर्ड कराते थे। इन्हीं दस्तावेज से बैंक खाते खोलते और इन्हीं पर मोबाइल सिम लेते थे। इसके बाद फर्जी फर्म से बिना किसी लेनदेन के बिल बनाकर कारोबार दिखाया जाता और इनके माध्यम से जीएसटी की रकम हड़प ली जाती।
0 टिप्पणियाँ