अमरावती/तिरुपति: आंध्र प्रदेश से दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहाँ संदिग्ध दूध में मिलावट (Milk Adulteration) के कारण होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहरीला दूध पीने से मरने वालों का आंकड़ा अब बढ़कर 16 हो गया है। इस घटना ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गांव-गांव में पसरा मातम, अस्पतालों में भीड़
आंध्र प्रदेश के प्रभावित जिलों में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि एक विशेष डेयरी या स्थानीय वेंडर्स से आपूर्ति किए गए दूध का सेवन करने के बाद लोगों को उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। देखते ही देखते दर्जनों लोग बीमार पड़ गए। स्थानीय अस्पतालों के बेड भर चुके हैं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेजों में रेफर किया गया है।
मिलावट का घातक खेल: यूरिया और डिटर्जेंट का शक?
प्रारंभिक जांच और डॉक्टरों के अनुसार, दूध में झाग बनाने और गाढ़ापन बढ़ाने के लिए यूरिया, डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा जैसे घातक रसायनों के इस्तेमाल का संदेह है। खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) ने विभिन्न इलाकों से दूध के नमूने लेकर लैब में भेजे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की मिलावट शरीर के अंगों, विशेषकर लिवर और किडनी को तुरंत फेल कर सकती है।
मुख्यमंत्री ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मामले की उच्च स्तरीय जांच (High-level Probe) के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ 'हत्या' का मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की भी घोषणा की है।
डेयरी मालिकों और वेंडर्स पर पुलिसिया कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में अब तक कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। प्रभावित इलाकों की डेयरियों को सील कर दिया गया है और स्टॉक की सघन तलाशी ली जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, वे खुले दूध का सेवन करने से बचें और केवल प्रमाणित पैकेट बंद दूध का ही इस्तेमाल करें।
खाद्य सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
इतनी बड़ी संख्या में मौतों ने राज्य के खाद्य सुरक्षा तंत्र की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मिलावट का धंधा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब जब 16 लोगों की जान चली गई है, तब जाकर विभाग सक्रिय हुआ है।
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