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ईरान ने भारत के सामने रखी शर्त, सुरक्षित मार्ग के बदले 3 टैंकरों की रिहाई की मांग

 

नई दिल्ली/तेहरान: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी के बीच भारत और ईरान के कूटनीतिक संबंधों में एक नया मोड़ आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया और रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने भारत के सामने एक स्पष्ट 'एक्सचेंज ऑफर' रखा है। ईरान ने मांग की है कि यदि भारत अपने जहाजों के लिए होर्मुज के रास्ते सुरक्षित रास्ता चाहता है, तो उसे फरवरी में जब्त किए गए तीन ईरानी टैंकरों को रिहा करना होगा।

ईरान की मुख्य शर्तें और मांगें

ईरान के राजदूत ने सोमवार को नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान ईरान की ओर से निम्नलिखित प्रस्ताव रखे गए:

  • 3 टैंकरों की रिहाई: ईरान ने 'एस्फाल्ट स्टार' (Asphalt Star), 'अल जफ्जिया' (Al Jafzia) और 'स्टेलर रूबी' (Stellar Ruby) नामक जहाजों की तुरंत रिहाई की मांग की है। भारत ने इन जहाजों को पहचान छिपाने और अवैध रूप से तेल के लेनदेन के आरोप में मुंबई तट के पास जब्त किया था।

  • दवाइयों की आपूर्ति: तेल टैंकरों के साथ-साथ ईरान ने मानवीय आधार पर कुछ विशेष जीवन रक्षक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की भी मांग की है।

भारत के लिए संकट और कूटनीतिक प्रयास

भारत के लिए यह स्थिति काफी जटिल है क्योंकि:

  1. ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों का लगभग 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। वर्तमान में कम से कम 22 भारतीय जहाज और 611 नाविक खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिनमें से 6 जहाज एलपीजी से लदे हुए हैं।

  2. कोई स्थायी समझौता नहीं: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ "ब्लैंकेट अरेंजमेंट" (पूर्ण समझौता) नहीं हुआ है। हर जहाज की आवाजाही एक अलग घटना है और इसके लिए हर बार समन्वय (Coordination) करना पड़ रहा है।

  3. अंतरराष्ट्रीय दबाव: जब्त किए गए जहाजों पर अमेरिकी प्रतिबंध भी लगे हुए हैं, जिससे भारत के लिए उन्हें छोड़ना अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

राहत की खबर: 'शिवालिक' की सफल वापसी

तनाव के बीच एक सकारात्मक खबर यह है कि भारतीय एलपीजी टैंकर 'शिवालिक' सोमवार शाम गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित पहुँच गया है। यह जहाज 40,000 मीट्रिक टन गैस लेकर आ रहा था, जिससे देश में रसोई गैस की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा 'जग लाडली' नामक जहाज भी सुरक्षित मार्ग पर है।

क्या अब सुलझेगा विवाद?

हालांकि ईरान ने 'सुरक्षित मार्ग' को 'टैंकरों की रिहाई' से जोड़ दिया है, लेकिन भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसे एक 'सौदा' (Exchange Issue) मानने से इनकार किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जहाजों की आवाजाही दोनों देशों के पुराने संबंधों और निरंतर हो रही बातचीत का परिणाम है।

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