हापुड़: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर ने पूरी दुनिया के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के हापुड़ में भी गहरा शोक और आक्रोश पैदा कर दिया है। खामेनेई के निधन के बाद हापुड़ का शिया समुदाय सड़कों पर उतर आया है। समुदाय के लोगों ने इस घटना को लेकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और इजरायल व अमेरिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
गम और गुस्से का माहौल, निकाला गया मातम जुलूस
हापुड़ के विभिन्न मोहल्लों से शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए और एक शोक सभा का आयोजन किया। इसके बाद एक विशाल विरोध मार्च (Protest March) निकाला गया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में अयातुल्ला खामेनेई की तस्वीरें और काले झंडे थे। समुदाय के धर्मगुरुओं ने इसे पूरी मुस्लिम दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने इजरायल विरोधी नारे लगाए और इस वैश्विक तनाव के लिए पश्चिमी देशों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
बाजार बंद, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
खामेनेई के निधन के प्रति सम्मान और विरोध स्वरूप हापुड़ के शिया बहुल इलाकों में व्यापारियों ने अपनी दुकानें स्वतः स्फूर्त बंद रखीं। शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों और खुफिया विभाग की टीमें स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति की अपील की और उन्हें निर्धारित मार्ग पर ही जुलूस निकालने की अनुमति दी।
'इस्लामिक जगत के एक युग का अंत'
हापुड़ के शिया उलेमाओं ने अपने संबोधन में कहा कि अयातुल्ला खामेनेई केवल ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि वे मजलूमों की आवाज थे। उन्होंने कहा कि उनके निधन से इस्लामिक जगत में जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरना नामुमकिन है। समुदाय ने घोषणा की है कि अगले कुछ दिनों तक विशेष मजलिस (शोक सभाएं) आयोजित की जाएंगी और उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआएं मांगी जाएंगी।
वैश्विक तनाव का असर स्थानीय स्तर पर
ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध और ईरान में हुए हालिया घटनाक्रमों का सीधा असर भारत के विभिन्न शहरों में देखा जा रहा है। हापुड़ में हुआ यह प्रदर्शन उसी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का हिस्सा है, जहां समुदाय के लोग अपने आध्यात्मिक और राजनीतिक नेतृत्व के प्रति एकजुटता दिखा रहे हैं।
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