आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए राजनीति के मैदान से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको हिला कर रख डाल दिया है। पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने एक साथ 'झाड़ू' छोड़कर भाजपा का 'कमल' थाम लिया है। इस अचानक हुए दलबदल ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में खलबली मचा दी है।
संसद में बचा सिर्फ नाम!
राज्यसभा में जहां आम आदमी पार्टी अपनी धाक जमाए बैठी थी, वहां अब उसके पास केवल 3 सांसद रह गए हैं। सांसदों की इतनी बड़ी फौज का पाला बदलना यह साफ इशारा कर रहा है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। अब सदन के अंदर वोटिंग हो या किसी कानून का विरोध, 'आप' की आवाज कमजोर पड़ना तय माना जा रहा है।
लोकसभा में भी बढ़ी टेंशन
सिर्फ राज्यसभा ही नहीं, लोकसभा में भी पार्टी की स्थिति अब सवालों के घेरे में है। जिस तेजी से सांसद टूटकर भाजपा में जा रहे हैं, उससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम भी बागी तेवर दिखा सकते हैं?
बीजेपी की बड़ी चाल या 'आप' की बड़ी चूक?
जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस सेंधमारी के जरिए ऊपरी सदन में अपनी ताकत को और बढ़ा लिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई जैसा है। अब देखना यह होगा कि अरविंद केजरीवाल इस टूट को कैसे संभालते हैं और क्या वो अपने बचे हुए कुनबे को एक साथ रख पाएंगे?
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