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चंद्रग्रहण समाप्त: संगम नगरी प्रयागराज में आस्था का सैलाब, सूतक खत्म होते ही मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़


प्रयागराज:
साल 2026 के पहले पूर्ण चंद्रग्रहण की समाप्ति के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज सहित देशभर में धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य का सिलसिला शुरू हो गया है। ग्रहण का मोक्ष काल पूरा होते ही प्रयागराज के मंदिरों के कपाट खोल दिए गए और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में आस्था की डुबकी लगाई।

सूतक काल खत्म, मंदिरों में हुआ शुद्धिकरण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और सूतक काल प्रभावी रहता है। जैसे ही चंद्रग्रहण समाप्त हुआ, प्रयागराज के प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर, अलोपी देवी और मनकामेश्वर मंदिर सहित सभी देवालयों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। मंदिरों के गर्भगृह को गंगाजल से धोया गया और मूर्तियों का अभिषेक कर विशेष आरती की गई।

संगम तट पर उमड़ा जनसैलाब

कड़ाके की ठंड और देर रात के बावजूद संगम तट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे। पौराणिक मान्यता है कि ग्रहण के बाद पवित्र नदियों में स्नान करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद लोगों ने अपने सामर्थ्य के अनुसार अनाज, वस्त्र और धन का दान किया।

पंडितों और ज्योतिषियों का मत

ज्योतिषविदों के अनुसार, यह पूर्ण चंद्रग्रहण कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। ग्रहण की समाप्ति के बाद घरों में भी साफ-सफाई की गई और तुलसी दल डालकर शुद्ध किए गए भोजन का सेवन किया गया। प्रयागराज के विद्वान पंडितों का कहना है कि ग्रहण के बाद किया गया भजन और दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

सुरक्षा और प्रशासन के पुख्ता इंतजाम

स्नान पर्व को देखते हुए प्रयागराज मेला प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। संगम की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई थी और जल पुलिस के साथ-साथ गोताखोरों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

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