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ईरान की हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी: यूरोपीय देशों सहित 22 राष्ट्रों ने की कड़ी निंदा

 


तेहरान/ब्रसेल्स: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान द्वारा 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बंद करने की हालिया धमकी ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। अधिकांश यूरोपीय देशों सहित दुनिया के 22 प्रमुख राष्ट्रों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान के इस रुख की कड़ी निंदा की है। इन देशों ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नेविगेशन की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल आपूर्ति की 'लाइफलाइन'

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक चोक पॉइंट्स में से एक है। यह ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी को जोड़ता है। वैश्विक स्तर पर खपत होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। ईरान की इस धमकी का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

22 देशों का संयुक्त कड़ा रुख

संयुक्त निंदा प्रस्ताव में शामिल देशों में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे प्रमुख यूरोपीय राष्ट्रों के साथ-साथ कई अन्य वैश्विक सहयोगी शामिल हैं। इन देशों का तर्क है कि हॉर्मुज को बंद करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) का खुला उल्लंघन है। बयान में कहा गया है कि यदि ईरान इस जलमार्ग को अवरुद्ध करने का प्रयास करता है, तो इसके गंभीर आर्थिक और सैन्य परिणाम हो सकते हैं।

ईरान की धमकी के पीछे के कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और हालिया क्षेत्रीय तनाव के जवाब में तेहरान अपनी रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। ईरान अक्सर दबाव की स्थिति में हॉर्मुज को बंद करने की चेतावनी देता रहा है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर वह अपनी बात मनवा सके। हालांकि, इस बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एकजुट होना ईरान के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा

यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति में भारी कमी आएगी। इससे न केवल यूरोप बल्कि एशिया के कई विकासशील देशों में भी ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। शिपिंग बीमा दरों में वृद्धि और समुद्री परिवहन में देरी से वैश्विक व्यापारिक चेन पूरी तरह चरमरा सकती है।

अमेरिका और सहयोगियों की निगरानी

अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (Fifth Fleet) पहले से ही इस क्षेत्र में तैनात है और हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहा है। 22 देशों की इस निंदा के बाद यह संकेत साफ है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय गठबंधन इस जलमार्ग को खुला रखने के लिए बल प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हटेगा। फिलहाल, सभी देशों ने ईरान से संयम बरतने और कूटनीतिक बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की अपील की है।

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