हस्तिनापुर (मेरठ): ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी हस्तिनापुर के कैलाश पर्वत परिसर में भगवान आदिनाथ की भक्ति की बयार बह रही है। यहाँ 48 दिवसीय 'भक्तामर अनुष्ठान' (Bhaktamar Ritual) का श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजन किया गया। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की स्तुति में आयोजित इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर धर्म लाभ ले रहे हैं।
मंत्रोच्चार और ऋद्धियों के साथ भक्तामर पाठ
अनुष्ठान के दौरान विद्वान पंडितों और साधु-संतों के सानिध्य में भक्तामर स्तोत्र के 48 काव्यों का विधि-विधान से पाठ किया गया। प्रत्येक काव्य के साथ विशेष मंत्रों और ऋद्धियों का आह्वान किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। मान्यता है कि भक्तामर स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शांति और शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है।
भगवान आदिनाथ का अभिषेक और महामस्तकाभिषेक
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का अभिषेक और शांतिधारा रही। स्वर्ण और रजत कलशों से भगवान का अभिषेक किया गया, जिसके बाद सामूहिक आरती का आयोजन हुआ। भक्तों ने भक्ति नृत्य और भजनों के माध्यम से अपनी श्रद्धा निवेदित की। कैलाश पर्वत की भव्यता के बीच आयोजित इस अनुष्ठान ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आध्यात्मिक साधना और तप का संगम
48 दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में कई श्रद्धालु उपवास और विशेष साधना का पालन कर रहे हैं। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के सामूहिक अनुष्ठानों का उद्देश्य विश्व शांति और प्राणी मात्र के कल्याण की कामना करना है। दूर-दराज से आए जैन समाज के अनुयायियों के लिए आवास और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है।
हस्तिनापुर की धार्मिक विरासत और कैलाश पर्वत
हस्तिनापुर अपनी प्राचीन जैन विरासतों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। कैलाश पर्वत की अद्वितीय रचना और वहाँ होने वाले ये धार्मिक आयोजन इस क्षेत्र की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। आयोजन समिति ने बताया कि अनुष्ठान के समापन पर एक विशाल शोभायात्रा और महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।
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