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मेरठ: जवाहर नवोदय प्रवेश परीक्षा में बच्चों ने गाड़ा सफलता का झंडा

 




किशनपुर बिराना स्कूल का ऐतिहासिक प्रदर्शन

मेरठ: शिक्षा के क्षेत्र में ग्रामीण अंचल के सरकारी स्कूलों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। मेरठ के किशनपुर बिराना स्थित प्राथमिक विद्यालय ने 'जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा 2026-27' (Jawahar Navodaya Entrance Exam) में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। स्कूल के कई छात्रों ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा को उत्तीर्ण कर न केवल अपने संस्थान का, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है।

ग्रामीण प्रतिभा ने बिखेरी चमक

जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश पाना किसी भी छात्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि यहाँ चयन के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है। किशनपुर बिराना स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन और बच्चों की कड़ी मेहनत का परिणाम है कि इस वर्ष विद्यालय से रिकॉर्ड संख्या में छात्रों का चयन हुआ है। ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की यह सफलता यह साबित करती है कि यदि सही दिशा मिले, तो सरकारी स्कूल के बच्चे भी किसी से कम नहीं हैं।

शिक्षकों के विशेष प्रयास और मुफ्त कोचिंग का असर

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विद्यालय के प्रधानाध्यापक और सहायक शिक्षकों का बड़ा योगदान है। स्कूल प्रबंधन द्वारा नवोदय की तैयारी के लिए छात्रों को विशेष कक्षाएं और एक्स्ट्रा समय दिया गया। शिक्षकों ने न केवल पाठ्यक्रम को पूरा कराया, बल्कि बच्चों को रीजनिंग, गणित और भाषा के जटिल सवालों को हल करने की विशेष तकनीकें भी सिखाईं। स्कूल में आयोजित किए गए मॉक टेस्ट और नियमित अभ्यास ने बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अभिभावकों और ग्रामीणों में हर्ष का माहौल

जैसे ही प्रवेश परीक्षा के परिणाम घोषित हुए, पूरे किशनपुर बिराना गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। सफल छात्रों के परिवारों को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि यह सफलता उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगी, क्योंकि नवोदय विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सर्वांगीण विकास के अवसर मिलते हैं।

शिक्षा विभाग ने दी बधाई

मेरठ के बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी किशनपुर बिराना स्कूल की इस उपलब्धि की सराहना की है। अधिकारियों के अनुसार, अन्य सरकारी स्कूलों को भी इस सफलता से प्रेरणा लेनी चाहिए। विभाग का लक्ष्य है कि जिले के अधिक से अधिक बच्चे ऐसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लें और सफल हों।

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