मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की एक विशेष अदालत ने 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। किठौर क्षेत्र के इस चर्चित मामले में न्यायालय ने मुख्य आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में केस में नामजद अन्य सात आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 16 फरवरी 2023 की है, जब किठौर के शाहजहांपुर निवासी एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि उसकी 10 साल की नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर अगवा किया गया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) की वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर बक्शी, अजय, घमंडी, राजकुमार, जयकरन, मनोज, सतीश और विजय के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
कड़ी धाराओं के तहत चली कानूनी प्रक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376-एबी (12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की सख्त धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। बता दें कि कानून में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ यौन अपराध के मामलों में मृत्युदंड या न्यूनतम 20 साल की सजा का प्रावधान है।
कोर्ट का फैसला: बक्शी को सजा, सात अन्य बरी
विशेष पॉक्सो कोर्ट प्रथम की न्यायाधीश शिवानी सिंह की अदालत में इस मामले की अंतिम सुनवाई हुई। उपलब्ध गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने मुख्य आरोपी बक्शी (निवासी आजाद नगर/अहेरियान, शाहजहांपुर) को दोषी पाया। अदालत ने उसे 20 साल की कैद और 15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, पर्याप्त सबूत न मिल पाने के कारण कोर्ट ने बाकी सात नामजद आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
क्षेत्र में फैसले की चर्चा
मासूम बच्ची को न्याय मिलने के इस फैसले की पूरे क्षेत्र में चर्चा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सख्त फैसलों से समाज में अपराधियों के बीच डर पैदा होगा और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी आएगी। पुलिस प्रशासन ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ी जीत बताया है।
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