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तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि का कहर, गेहूं की फसल जमीन पर बिछी


किसान परेशान

मेरठ (बहसूमा): उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद स्थित बहसूमा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की कमर तोड़ दी है। क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि के कारण गेहूं की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुँचा है। खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गई हैं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

बेमौसम बारिश और ओलों की मार

सोमवार को अचानक मौसम में आए बदलाव के बाद बहसूमा क्षेत्र में आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते तेज रफ्तार हवाओं के साथ ओले गिरने शुरू हो गए। लगभग 15 से 20 मिनट तक हुई ओलावृष्टि ने फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया। विशेष रूप से गेहूं, जो इस समय अपनी परिपक्वता (Maturation) की स्थिति में था, ओलों के बोझ और हवा के दबाव को झेल नहीं सका।

गेहूं और सरसों की फसल को सर्वाधिक नुकसान

किसानों का कहना है कि गेहूं की बालियां भारी होने के कारण तेज हवा में पौधे गिर गए हैं। गिरी हुई फसल के दाने काले पड़ने और वजन कम होने का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा:

  • सरसों: कटाई के लिए तैयार सरसों की फलियां ओलों की चोट से टूटकर जमीन पर गिर गई हैं।

  • सब्जियां: बेल वाली सब्जियों और चारे की फसलों को भी नुकसान पहुँचा है।

  • आम के बाग: तेज हवा के कारण आम के बौर (फूल) झड़ गए हैं, जिससे बागवानों को भी आर्थिक चपत लगी है।

मुआवजे की मांग को लेकर किसान चिंतित

खेतों की स्थिति देख किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है। पीड़ित किसानों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द राजस्व विभाग की टीमों को भेजकर 'गिरदावरी' (फसल नुकसान का आकलन) कराई जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर फसल तैयार की थी, लेकिन कुदरत की मार ने सब बर्बाद कर दिया।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अभी खेतों में पानी न लगाएं, क्योंकि जमीन गीली होने और हवा चलने से बची हुई फसल के गिरने का डर ज्यादा रहता है। साथ ही, किसान अपनी फसल के नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत संबंधित बीमा कंपनी या कृषि विभाग को अवश्य दें ताकि दावों का निपटान हो सके।

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