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सरकारी अस्पताल में 4 दिनों से गैस खत्म, चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर रसोइया

 

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल में पिछले चार दिनों से एलपीजी (LPG) गैस की किल्लत के चलते मरीजों के लिए खाना बनाना दूभर हो गया है। आलम यह है कि अस्पताल के रसोइए को मरीजों के लिए भोजन तैयार करने हेतु ईंटों का अस्थायी चूल्हा और लकड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस घटना के सामने आने के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच दावों और प्रतिदावों का दौर शुरू हो गया है।

मरीजों की सेहत से खिलवाड़: चूल्हे के धुएं में पक रहा भोजन

अस्पताल के किचन से आई तस्वीरों और खबरों ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। रसोईघर में गैस सिलेंडर न होने के कारण रसोइया जमीन पर ईंटें रखकर खाना पका रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को समय पर और स्वच्छ भोजन देना अनिवार्य है, लेकिन लकड़ी के धुएं के बीच बन रहा यह खाना स्वच्छता मानकों पर भी सवाल खड़े कर रहा है। रसोइए का कहना है कि गैस खत्म होने की सूचना बार-बार दी गई, लेकिन कई दिनों तक कोई समाधान नहीं निकला।

अधिकारियों के बीच खींचतान: एलपीजी की कमी पर विरोधाभास

गैस की किल्लत की खबर फैलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। हालांकि, इस मामले में अधिकारियों के बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहाँ एक तरफ अस्पताल स्टाफ गैस की भारी कमी की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ उच्चाधिकारी इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर आपसी टकराव की स्थिति बन गई है कि आखिर गैस की आपूर्ति समय पर क्यों नहीं की गई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल

मेरठ जैसे बड़े शहर के सरकारी अस्पताल में इस तरह की बुनियादी सुविधा का अभाव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है। मरीजों के परिजनों ने भी इस अव्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार हाई-टेक अस्पतालों की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय के अस्पतालों में खाना बनाने तक के लिए गैस उपलब्ध नहीं है।

जांच के आदेश और वैकल्पिक व्यवस्था

मामले के तूल पकड़ने के बाद अब प्रशासन हरकत में आया है। संबंधित विभाग ने इस देरी के कारणों की जांच के आदेश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, वेंडर और अस्पताल प्रबंधन के बीच भुगतान या समन्वय की कमी इस किल्लत की मुख्य वजह हो सकती है। फिलहाल, वैकल्पिक तौर पर गैस सिलेंडर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों को धुएं से मुक्त और स्वच्छ भोजन मिल सके।

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