यूपी एटीएस की बड़ी कार्रवाई:
लखनऊ: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (UP ATS) ने एक बड़े जालसाजी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अवैध रूप से फर्जी आधार कार्ड और अन्य सरकारी पहचान पत्र बनाने के धंधे में लिप्त था। एटीएस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार बेहद गहरे हैं और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता था।
अवैध तरीके से बनाए जा रहे थे पहचान पत्र
एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि लखनऊ और आसपास के इलाकों में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो असली दस्तावेजों की क्लोनिंग कर या पूरी तरह से फर्जी आधार कार्ड तैयार कर रहा है। छापेमारी के दौरान गिरफ्तार आरोपी के पास से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण, लैपटॉप, प्रिंटर और कई फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। आरोपी तकनीकी रूप से काफी सक्षम बताया जा रहा है, जो आधार डेटाबेस की सुरक्षा में सेंध लगाने या पोर्टल का गलत इस्तेमाल करने के तरीके जानता था।
सुरक्षा एजेंसियों के उड़े होश: घुसपैठियों को मदद का शक
यूपी एटीएस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या इन फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों या किसी संदिग्ध तत्व द्वारा किया जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि यह गिरोह मोटी रकम लेकर उन लोगों को भारतीय पहचान पत्र मुहैया कराता था, जिनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं होते। इस तरह की जालसाजी का सीधा संबंध घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों के लिए रसद मुहैया कराने से जोड़ा जा रहा है।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज
गिरफ्तार किए गए व्यक्ति से पूछताछ के आधार पर यूपी एटीएस अब गिरोह के मुख्य सरगना और अन्य साथियों की तलाश में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने फर्जी आधार कार्ड जारी किए हैं और उनके लाभार्थी कौन हैं। एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि डेटा प्राइवेसी और राष्ट्रीय पहचान प्रणाली के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तकनीक का दुरुपयोग और प्रशासन की चेतावनी
यह मामला आधार जैसे महत्वपूर्ण पहचान पत्र की सुरक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। प्रशासन ने लोगों को आगाह किया है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों से ही अपना आधार कार्ड बनवाएं या अपडेट कराएं। एटीएस अब यूआईडीएआई (UIDAI) के विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह समझने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने सिस्टम में मौजूद किस खामी का फायदा उठाया।
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