मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्मार्ट मीटर (Smart Meter) उपभोक्ताओं के लिए कल की रात किसी दुस्वप्न से कम नहीं रही। सर्वर में आई तकनीकी खराबी के चलते शहर के हजारों घरों की बिजली अचानक गुल हो गई। सबसे ज्यादा परेशानी उन उपभोक्ताओं को हुई जिन्होंने अपना मीटर रिचार्ज तो कर लिया था, लेकिन सर्वर डाउन होने की वजह से वह राशि मीटर में अपडेट नहीं हो सकी, जिसके परिणामस्वरूप ऑटोमैटिक सिस्टम ने बिजली काट दी।
भीषण गर्मी में घंटों अंधेरे में रहे लोग
मेरठ के शास्त्रीनगर, जागृति विहार, पल्लवपुरम और कंकरखेड़ा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर देखा गया। रात के समय जब तापमान अधिक था, तब अचानक बिजली कटने से बच्चे और बुजुर्ग बेहाल हो गए। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्होंने मोबाइल ऐप के जरिए पैसे जमा किए, लेकिन बैलेंस 'जीरो' ही दिखाता रहा।
बिजली दफ्तरों पर उमड़ी भीड़ और प्रदर्शन
परेशान उपभोक्ता बड़ी संख्या में स्थानीय बिजली घरों (Sub-stations) पर जमा हो गए और विभागीय लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
गुस्सा: लोगों का कहना है कि जब सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल है, तो सर्वर की बैकअप व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
अधिकारियों का रुख: हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और बिजली विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को समझाने की कोशिश की कि यह तकनीकी खामी स्टेट हेडक्वार्टर के सर्वर से है, जिसे ठीक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
तकनीकी खराबी या सिस्टम की विफलता?
ऊर्जा निगम के सूत्रों के अनुसार, स्मार्ट मीटर के डेटा सेंटर में आए 'ग्लिच' (Glitch) की वजह से बिलिंग और रिचार्जिंग सिस्टम का संपर्क मीटरों से टूट गया था। इस दौरान जिन लोगों का बैलेंस खत्म हुआ, सिस्टम ने उन्हें 'डिफॉल्टर' मानकर सप्लाई काट दी, जबकि मैनुअल तरीके से इसे बहाल करने में तकनीकी बाधाएं आ रही थीं।
अस्थायी समाधान और आश्वासन
भारी विरोध के बाद विभाग ने कुछ क्षेत्रों में 'कमांड' भेजकर बिजली आपूर्ति को अस्थाई रूप से बहाल करने की कोशिश की। मुख्य अभियंता ने आश्वासन दिया है कि जिन उपभोक्ताओं के पैसे कट गए हैं और रिचार्ज अपडेट नहीं हुआ है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है; सर्वर ठीक होते ही उनका बैलेंस स्वतः अपडेट हो जाएगा। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए सर्वर की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
उपभोक्ताओं की मांग: "पहले सिस्टम सुधारें, फिर लगाएं स्मार्ट मीटर"
इस घटना ने स्मार्ट मीटर की विश्वसनीयता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय व्यापार मंडलों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जब तक विभाग का सर्वर और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होता, तब तक उपभोक्ताओं को इस तरह के डिजिटल प्रयोगों का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए।
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