नई दिल्ली/मुंबई: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के बीच भारत के लिए राहत की एक और बड़ी खबर आई है। भारतीय नौसेना के कड़े पहरे में 'जग लाडली' (Jag Laadli) नामक दूसरा एलपीजी (LPG) टैंकर भी सुरक्षित भारतीय तट पर पहुँच गया है। इस सफलता के साथ ही सरकार ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे अन्य 22 जहाजों और सैकड़ों भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने के कूटनीतिक और सैन्य प्रयास तेज कर दिए हैं।
'जग लाडली' की सुरक्षित घर वापसी
'आईएनएस शिवालिक' के बाद, भारतीय नौसेना के एक अन्य युद्धपोत ने 'जग लाडली' को ओमान की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक सुरक्षा घेरा प्रदान किया।
गैस की खेप: यह टैंकर लगभग 32,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर पहुँचा है।
सप्लाई चेन को मजबूती: लगातार दो टैंकरों के पहुँचने से देश के बॉटलिंग प्लांटों में कच्चे माल की कमी दूर होगी और रसोई गैस के वितरण में आ रही बाधाएं कम होंगी।
अभी भी 22 जहाज और 611 नाविक फंसे
सफलता के बावजूद चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अभी भी 22 व्यापारिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के 'वार जोन' में फंसे हुए हैं।
6 गैस टैंकर: इनमें से 6 जहाज एलपीजी और कच्चा तेल लेकर आ रहे हैं, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय नाविक: इन जहाजों पर कुल 611 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) लगातार ईरानी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों के संपर्क में है।
'ऑपरेशन संकल्प' का विस्तार
भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपने 'ऑपरेशन संकल्प' का दायरा बढ़ा दिया है।
हवाई निगरानी: नौसेना के पी-8आई (P-8I) टोही विमान और ड्रोन लगातार समुद्री मार्ग की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या हमले को पहले ही भांपा जा सके।
एस्कॉर्ट मिशन: आने वाले दिनों में फंसे हुए अन्य जहाजों को 'कॉन्वॉय' (समूह) बनाकर भारतीय युद्धपोतों की निगरानी में बाहर निकाला जाएगा।
कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और विदेश मंत्रालय इस संकट को सुलझाने के लिए 'बैक चैनल' डिप्लोमेसी का सहारा ले रहे हैं।
ईरान से वार्ता: भारत ने ईरान से अपील की है कि व्यापारिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को युद्ध की राजनीति से अलग रखा जाए।
वैकल्पिक मार्ग: भविष्य के संकटों से बचने के लिए भारत अब अन्य समुद्री मार्गों और मध्य एशियाई देशों के जरिए ऊर्जा आपूर्ति के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
घरेलू बाजार पर असर
पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटों में रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ऊंचे 'इंश्योरेंस प्रीमियम' के कारण आने वाले समय में एलपीजी और ईंधन के दामों में मामूली बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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