रेरा बोर्ड का बड़ा फैसला
लखनऊ: उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) की 118वीं बोर्ड बैठक में प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। चेयरमैन संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लखनऊ, आगरा और वाराणसी सहित 13 जिलों की 24 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण (Registration) को हरी झंडी दे दी गई है।
किन जिलों को मिली सौगात?
रेरा बोर्ड ने जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी है, वे मुख्य रूप से विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन जिलों में स्थित हैं:
लखनऊ और आगरा: यहाँ आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह के प्रोजेक्ट्स को अनुमति मिली है।
वाराणसी और प्रयागराज: धार्मिक और पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे इन शहरों में नए प्रोजेक्ट्स से बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।
अन्य जिले: झांसी, मथुरा, बरेली और मुरादाबाद जैसे शहरों की फाइलों पर भी बोर्ड ने अपनी मुहर लगा दी है।
सख्त मानकों के बाद मिली अनुमति
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि इन 24 परियोजनाओं को मंजूरी केवल तभी दी गई है जब उन्होंने रेरा के कड़े मानकों को पूरा किया।
भूमि का मालिकाना हक: बिल्डरों को भूमि के स्पष्ट स्वामित्व और विवाद मुक्त होने के प्रमाण देने पड़े।
नक्शा और अप्रूवल: स्थानीय प्राधिकरणों (LDA, ADA आदि) से स्वीकृत नक्शे और लेआउट प्लान की सघन जांच की गई।
वित्तीय क्षमता: प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए बिल्डर की वित्तीय स्थिति और एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) के नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया।
5 पुरानी परियोजनाओं का पंजीकरण खारिज
जहाँ एक तरफ नए प्रोजेक्ट्स को राहत मिली है, वहीं बोर्ड ने नियमों की अनदेखी करने वाले बिल्डरों पर गाज भी गिराई है। मानकों पर खरा न उतरने और जरूरी दस्तावेज जमा न करने के कारण 5 पुरानी परियोजनाओं के पंजीकरण आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। रेरा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना वैध पंजीकरण के किसी भी प्रोजेक्ट का प्रचार या बिक्री करना कानूनन अपराध है।
घर खरीदारों के लिए क्या है फायदा?
रेरा के इस फैसले से बाजार में नए घरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के पास अधिक विकल्प होंगे।
सुरक्षित निवेश: रेरा से पंजीकृत होने का मतलब है कि खरीदार का निवेश सुरक्षित है और बिल्डर को प्रोजेक्ट समय पर पूरा करना होगा।
पारदर्शिता: अब इन प्रोजेक्ट्स की पूरी जानकारी (जैसे कंस्ट्रक्शन स्टेटस, पार्किंग डिटेल्स आदि) रेरा की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी।
शिकायत निवारण पर भी चर्चा
बैठक के दौरान लंबित शिकायतों और खरीदारों के रिफंड मामलों पर भी चर्चा हुई। बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि जिन मामलों में रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी हो चुके हैं, उनमें जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर वसूली की प्रक्रिया तेज की जाए।
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