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ईरान युद्ध ट्रंप की शर्तों पर होगा खत्म! जमीनी हमले के संकेत


वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका के नवनियुक्त रक्षा सचिव पीटे हेगसेथ (Pete Hegseth) के एक हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और विशेषकर मध्य पूर्व (Middle East) में खलबली मचा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी माने जाने वाले हेगसेथ ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ जारी तनाव अब अपनी चरम सीमा पर है और अमेरिका इसे अपनी शर्तों पर खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस बयान को ईरान पर एक संभावित जमीनी सैन्य कार्रवाई (Ground Operation) के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

"ट्रंप की शर्तें" और सख्त रुख

पीटे हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि बाइडन प्रशासन की "तुष्टीकरण की नीति" अब खत्म हो चुकी है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान को उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भारी कीमत चुकानी होगी।

  • सीधा संदेश: हेगसेथ के अनुसार, "हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर ईरान ने अपनी सीमाएं लांघीं, तो युद्ध हमारी शर्तों पर शुरू होगा और हमारी ही शर्तों पर खत्म होगा।"

  • इजरायल का समर्थन: अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपने सबसे करीबी सहयोगी इजरायल की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

क्या जमीनी हमले की तैयारी है?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हेगसेथ के बयानों में "बूट्स ऑन द ग्राउंड" (जमीनी सेना) का जिक्र करना एक बड़ा बदलाव है। अब तक अमेरिका केवल हवाई हमलों या आर्थिक प्रतिबंधों की बात करता रहा है, लेकिन अब:

  1. रणनीतिक ठिकानों पर नजर: अमेरिका ईरान के उन गुप्त ठिकानों को निशाना बना सकता है जहां परमाणु रिएक्टर या मिसाइल डिपो स्थित हैं।

  2. क्षेत्रीय गठबंधन: ट्रंप प्रशासन सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर एक नया सुरक्षा घेरा तैयार कर रहा है।

आर्थिक प्रतिबंधों का 'मैक्सिमम प्रेशर'

युद्ध की धमकियों के साथ-साथ अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से पंगु बनाने के लिए "मैक्सिमम प्रेशर 2.0" (Maximum Pressure 2.0) अभियान शुरू करने जा रहा है। इसका उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को शून्य पर लाना है ताकि वह हमास और हिजबुल्ला जैसे संगठनों की फंडिंग न कर सके।

दुनिया पर क्या होगा असर?

यदि अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष युद्ध छिड़ता है, तो इसके वैश्विक परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं:

  • तेल की कीमतों में उछाल: खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित होने से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं।

  • वैश्विक शेयर बाजार में गिरावट: युद्ध की अनिश्चितता से दुनिया भर के निवेशकों में डर का माहौल पैदा हो सकता है।

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