मवाना नगर पालिका: बोर्ड बैठक में भारी हंगामा
मवाना (मेरठ): जनपद की मवाना नगर पालिका की बोर्ड बैठक एक बार फिर विवादों की भेंट चढ़ गई। विकास कार्यों के एजेंडे पर चर्चा के लिए बुलाई गई इस महत्वपूर्ण बैठक में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नवनिर्वाचित सभासदों और चेयरमैन पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि बैठक में अभद्रता और धमकी देने तक के आरोप लगाए गए।
विकास कार्यों के बजाय हंगामे पर जोर
बैठक की शुरुआत सामान्य रूप से हुई थी, लेकिन जैसे ही वार्डों में विकास कार्यों के बजट और टेंडर प्रक्रिया का मुद्दा उठा, सभासदों ने मोर्चा खोल दिया।
पक्षपात का आरोप: कई सभासदों का आरोप है कि चेयरमैन द्वारा चुनिंदा वार्डों में ही विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों की अनदेखी की जा रही है।
दुर्व्यवहार की शिकायत: विपक्षी सभासदों ने दावा किया कि जब उन्होंने अपनी बात रखनी चाही, तो उनके साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
हंगामे के चलते बैठक स्थगित
शोर-शराबे और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। सभासदों ने चेयरमैन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।
धरना प्रदर्शन: कुछ सभासद पालिका परिसर में ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
कार्यपालक अधिकारी का हस्तक्षेप: मौके पर मौजूद अधिशासी अधिकारी (EO) ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन माहौल इतना तनावपूर्ण था कि बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा।
पुलिस तक पहुंचा मामला
हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी नगर पालिका कार्यालय पहुंची। सभासदों के एक गुट ने थाने में तहरीर देकर सुरक्षा की मांग की है और चेयरमैन समर्थकों पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कर रही है ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके।
जनता का नुकसान
मवाना के स्थानीय नागरिकों में इस घटना को लेकर काफी रोष है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के आपसी विवाद के कारण शहर के विकास कार्य रुके हुए हैं। सफाई व्यवस्था से लेकर मार्ग प्रकाश (Street Lights) तक की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, जबकि बोर्ड बैठकें केवल हंगामे का केंद्र बनकर रह गई हैं।
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