मेरठ (शास्त्रीनगर): मेरठ के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्रों में से एक, सेंट्रल मार्केट (Central Market) में आज व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। समस्याओं का समाधान न होने और प्रशासन की अनदेखी से नाराज व्यापारियों ने सामूहिक रूप से 'जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार' का बोर्ड लगा दिया है। व्यापारी न केवल खुद, बल्कि अपने परिवारों के साथ सड़क पर उतर आए हैं।
क्यों भड़का व्यापारियों का गुस्सा?
सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों का आरोप है कि पिछले लंबे समय से वे बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि उनकी सुध लेने नहीं आया।
अतिक्रमण और जाम: बाजार में बेतरतीब अतिक्रमण और पार्किंग की कमी के कारण ग्राहकों का आना कम हो गया है, जिससे व्यापार चौपट हो रहा है।
बदहाल सड़कें और ड्रेनेज: थोड़ी सी बारिश में मार्केट में पानी भर जाता है और नालों की सफाई न होने से गंदगी का अंबार लगा रहता है।
सुरक्षा का अभाव: व्यापारियों ने बाजार में पुलिस गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी कैमरे लगवाने की मांग की थी, जिसे अनसुना कर दिया गया।
'नो एंट्री' के लगे पोस्टर
व्यापारियों ने मार्केट के प्रवेश द्वारों और दुकानों के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर चटका दिए हैं, जिन पर लिखा है— "जनप्रतिनिधियों का प्रवेश वर्जित है।"
नेताओं का बहिष्कार: व्यापारियों का कहना है कि नेता केवल वोट मांगने आते हैं। अब जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होगा, वे किसी भी नेता को मार्केट में घुसने नहीं देंगे।
परिवारों का साथ: इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि व्यापारियों की पत्नियां और बच्चे भी धरने में शामिल हुए। उनका कहना है कि इस बदहाली का असर उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
व्यापार संघ की चेतावनी
सेंट्रल मार्केट व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह विरोध केवल शुरुआत है।
टैक्स बंदी की धमकी: यदि जल्द ही नगर निगम और जिला प्रशासन ने कदम नहीं उठाए, तो व्यापारी सामूहिक रूप से टैक्स न भरने का निर्णय ले सकते हैं।
आंदोलन तेज होगा: व्यापारियों ने घोषणा की है कि वे अब अपना काम बंद कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को तैयार हैं।
प्रशासन में हड़कंप
व्यापारियों के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय राजनेताओं में खलबली मच गई है। पुलिस और नगर निगम के अधिकारी व्यापारियों को समझाने और बोर्ड हटवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन व्यापारी लिखित आश्वासन और धरातल पर काम शुरू होने की मांग पर अड़े हुए हैं।
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