मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत देखी जा रही है। गैस एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस संकट ने आम आदमी की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है।
गैस एजेंसियों पर हाहाकार
मेरठ के विभिन्न इलाकों में स्थित गैस वितरण केंद्रों पर उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट रहा है।
लंबा इंतजार: लोग तड़के 4 बजे से ही अपने खाली सिलेंडर लेकर कतारों में लग रहे हैं।
सप्लाई में कमी: डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि पीछे से ही रिफिल सिलेंडरों की आपूर्ति कम हो रही है, जिससे बुकिंग के बावजूद डिलीवरी में 10 से 15 दिनों की देरी हो रही है।
हंगामा: कई जगहों पर उपभोक्ताओं और एजेंसी कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे की खबरें भी सामने आई हैं।
पुराने दौर की ओर लौटे चूल्हे: उपलों की बढ़ी मांग
गैस न मिलने के कारण मध्यम और गरीब परिवारों को वैकल्पिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
महंगे हुए उपले: मेरठ के बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर के उपलों (Cow Dung Cakes) की मांग अचानक बढ़ गई है। मांग बढ़ने के कारण इनके दामों में भी भारी उछाल आया है।
लकड़ी का सहारा: लोग खाना पकाने के लिए सूखी लकड़ी और कोयले का इंतजाम करने में जुटे हैं। कई घरों में सालों बाद फिर से मिट्टी के चूल्हे जलते देखे जा रहे हैं।
होटल और ढाबे प्रभावित: कमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है, जिससे छोटे होटल और ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
क्या है किल्लत की वजह?
आधिकारिक तौर पर अभी कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि:
ट्रांसपोर्टेशन में देरी: लॉजिस्टिक्स या प्लांट से आपूर्ति में तकनीकी समस्या हो सकती है।
बढ़ती मांग: शादी-ब्याह के सीजन और त्यौहारों के चलते मांग में अचानक बढ़ोतरी हुई है।
कालाबाजारी की आशंका: कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही है और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
प्रशासन से दखल की मांग
मेरठ के निवासियों ने जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग (Supply Department) से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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