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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, रिहायशी इलाकों में चल रहीं 44 व्यावसायिक संपत्तियां होंगी सील

 

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में अवैध रूप से संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) को रिहायशी क्षेत्रों (Residential Areas) में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा रही 44 इमारतों को तत्काल प्रभाव से सील करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद शहर के बिल्डरों और व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।

रिहायशी इलाकों में नियमों का उल्लंघन

यह मामला पिछले काफी समय से कानूनी प्रक्रिया के अधीन था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मेरठ के कई पॉश रिहायशी इलाकों में मास्टर प्लान की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर दुकानों, शोरूम और दफ्तरों का संचालन किया जा रहा है।

  • इलाकों की पहचान: शास्त्री नगर, साकेत, सिविल लाइंस और गढ़ रोड के आसपास की आवासीय सोसायटियों में इन संपत्तियों को चिन्हित किया गया है।

  • अदालत की सख्ती: सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद एमडीए अधिकारियों ने इन अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

एमडीए (MDA) को सीधी चेतावनी

अदालत ने केवल सीलिंग का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि एमडीए के संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है:

  1. एक्शन टेकन रिपोर्ट: प्राधिकरण को एक निश्चित समय सीमा के भीतर सीलिंग की कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

  2. मिलीभगत की जांच: कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यदि भविष्य में सील की गई संपत्तियों में दोबारा गतिविधियां शुरू हुईं, तो स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

निवासियों को मिलेगी राहत

इस फैसले का स्थानीय निवासियों ने स्वागत किया है। आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण निवासियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था:

  • ट्रैफिक और पार्किंग: शोरूम और दुकानों के कारण रिहायशी गलियों में जाम की स्थिति बनी रहती थी।

  • प्रदूषण और शोर: व्यावसायिक इस्तेमाल से ध्वनि प्रदूषण और कूड़ा निस्तारण की समस्या बढ़ गई थी।

  • सुरक्षा: बाहरी लोगों की निरंतर आवाजाही से स्थानीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था।

व्यापारियों की बढ़ी चिंता

दूसरी ओर, व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। व्यापारियों का तर्क है कि कई लोग दशकों से यहाँ अपना व्यवसाय चला रहे हैं और अचानक सीलिंग से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। व्यापारियों ने मांग की है कि सरकार को 'कंपाउंडिंग स्कीम' या किसी वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए राहत देनी चाहिए।

मेरठ विकास प्राधिकरण ने आदेश मिलते ही पुलिस बल के साथ सीलिंग अभियान का खाका तैयार कर लिया है। आगामी कुछ दिनों में शहर के विभिन्न हिस्सों में बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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