लखनऊ/मेरठ: उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) में पिछले कुछ दिनों से इंजीनियरों पर की जा रही प्रशासनिक कार्रवाई और निलंबन के फैसलों ने अब एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। राज्य विद्युत अभियंता संघ (Engineers Association) ने प्रबंधन के इन फैसलों को 'एकतरफा' करार देते हुए आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि बिना ठोस जांच के इंजीनियरों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में यूपीपीसीएल प्रबंधन ने लाइन लॉस, राजस्व वसूली में कमी और तकनीकी खामियों को आधार बनाकर कई जनपदों के अधिशासी अभियंताओं (EE) और सहायक अभियंताओं (AE) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
निलंबन की झड़ी: कई इंजीनियरों को बिना स्पष्टीकरण के निलंबित कर दिया गया है।
इंजीनियरों का तर्क: संघ का कहना है कि बिजली चोरी और लाइन लॉस के लिए केवल इंजीनियर जिम्मेदार नहीं हैं। बुनियादी ढांचे की कमी और स्टाफ की किल्लत जैसी समस्याओं को नजरअंदाज कर सारा ठीकरा अधिकारियों पर फोड़ा जा रहा है।
UPPCL चेयरमैन को सौंपा मांग पत्र
अभियंता संघ के पदाधिकारियों ने यूपीपीसीएल के चेयरमैन से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
एकतरफा कार्रवाई पर रोक: किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच कमेटी गठित की जाए।
काम का दबाव कम हो: फील्ड में तैनात इंजीनियरों पर राजस्व वसूली का अनैतिक दबाव न बनाया जाए।
संसाधनों की उपलब्धता: जर्जर तारों और ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए आवश्यक बजट और सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए।
आंदोलन की चेतावनी
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे 'कार्य बहिष्कार' (Work Boycott) जैसा कड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे। मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगम (PVVNL) के इंजीनियरों ने भी इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
बिजली उपभोक्ताओं पर असर की आशंका
यदि इंजीनियर संघ और प्रबंधन के बीच यह टकराव बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में आम जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। फॉल्ट ठीक करने और नए कनेक्शन जैसे कार्यों में देरी हो सकती है। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि वे अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और भ्रष्टाचार या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
0 टिप्पणियाँ