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महंगाई का महा-विस्फोट: 42 महीने के उच्चतम स्तर 8.3% पर पहुंची थोक महंगाई, कच्चे तेल के झटके से कांपी अर्थव्यवस्था

 


देश में थोक बाजार के स्तर पर महंगाई ने एक बड़ा और डरावना उछाल मारा है। अप्रैल 2026 में भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो कि पिछले साढ़े तीन साल (42 महीने) का सबसे ऊंचा स्तर है। मार्च 2026 में यह दर महज 3.88 प्रतिशत थी। इस अचानक आई तेजी ने सरकार और आम आदमी दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

क्रूड ऑयल और ग्लोबल टेंशन ने बिगाड़ा खेल

इस महा-विस्फोट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) है। खाड़ी देशों में बढ़ते संघर्ष और अमेरिका-इरान विवाद के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। अप्रैल में वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतों में सालाना आधार पर 54.2% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।

ईंधन और पावर सेक्टर में आग

ईंधन और बिजली (Fuel & Power) खंड में थोक महंगाई दर मार्च के 1.05% से सीधे छलांग लगाकर 24.71 प्रतिशत पर पहुंच गई है। मिनरल ऑयल, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF), पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल ने पूरी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट (लागत) को बढ़ा दिया है।

आम आदमी की जेब पर कब होगा असर?

राहत की बात सिर्फ इतनी है कि खाद्य पदार्थों (Food WPI) की महंगाई अभी भी नियंत्रण में (2.31%) है। इसके अलावा, खुदरा महंगाई दर (CPI) भी फिलहाल 3.48% पर स्थिर है क्योंकि सरकार और तेल कंपनियां बढ़े हुए दामों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालने से बच रही हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि तेल कंपनियां रोजाना भारी घाटा सह रही हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ना लगभग तय है, जिससे घरेलू बजट बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

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