अमेरिका और चीन के बीच जारी तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों ने ताइवान को लेकर एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी के बाद वैश्विक राजनीति और टेक जगत (Tech World) में हड़कंप मच गया है।
चीन के रडार पर ताइवान: 5 साल का अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकारों के अनुसार, अगले 5 साल ताइवान के अस्तित्व के लिए बेहद नाजुक होने वाले हैं। चीन किसी भी वक्त ताइवान पर बड़ा हमला कर सकता है या उसे अपने नियंत्रण में लेने के लिए आक्रामक रुख अपना सकता है। हाल ही में बीजिंग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद यह बात और खुलकर सामने आई है, जहां शी जिनपिंग ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी थी कि ताइवान मामले में थोड़ी सी भी चूक दोनों महाशक्तियों के बीच "सीधे टकराव और युद्ध" की वजह बन सकती है।
ग्लोबल टेक्नोलॉजी हो जाएगी पूरी तरह तबाह
ट्रंप के सलाहकारों ने केवल सैन्य हमले की ही नहीं, बल्कि इसके विनाशकारी आर्थिक परिणामों की भी चेतावनी दी है:
चिप सप्लाई ठप: ताइवान दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर (Microchip) निर्माता है। अगर चीन उस पर हमला करता है, तो वैश्विक चिप सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
कोई बैकअप प्लान नहीं: सलाहकारों का कहना है कि इस आर्थिक झटके से निपटने के लिए फिलहाल दुनिया के पास कोई रास्ता या तैयारी नहीं है। स्मार्टफोन, कार, कंप्यूटर से लेकर रक्षा उपकरणों तक का निर्माण रुक जाएगा।
हथियारों की डील और ट्रंप का रुख
इस बीच, अमेरिका द्वारा ताइवान के लिए मंजूर की गई 14 बिलियन डॉलर (लगभग ₹1.16 लाख करोड़) की आर्म्स डील (हथियारों की आपूर्ति) में हो रही देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे इस डील को और टालेंगे, तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय कहा कि वे चाहेंगे कि ताइवान की सभी बड़ी चिप निर्माता कंपनियां अमेरिका आकर अपनी फैक्ट्रियां लगाएं। ट्रंप के इस रुख से ताइवान की चिंताएं थोड़ी बढ़ गई हैं कि क्या अमेरिका संकट के समय पूरी तरह उसके साथ खड़ा रहेगा।
ताइवान का त्वरित पलटवार
इस पूरी चेतावनी और अमेरिकी बयानों पर ताइवान ने भी त्वरित प्रतिक्रिया दी है। ताइवान सरकार की ओर से कहा गया है कि अमेरिका की मूल नीति और ताइवान के प्रति उसके झुकाव में कोई कमी नहीं आई है। ताइवान ने साफ किया कि वह अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तानाशाही विस्तारवाद के आगे घुटने नहीं टेकेगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी चीन को सख्त लहजे में चेताया है कि ताइवान पर बल प्रयोग करना चीन की "सबसे बड़ी और भयानक भूल" साबित होगी।
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