मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की सनसनीखेज हत्या और उनके शव को टुकड़ों में काटकर सीमेंट के ड्रम में छिपाने वाले बहुचर्चित मामले में पुलिस ने एक और बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। मुख्य आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला से की गई सघन पूछताछ में यह बात सामने आई है कि लगातार हो रही ब्लैकमेलिंग और नशे की लत को छुपाने के लिए इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया था।
ब्लैकमेलिंग की कड़वी सच्चाई और हत्या की वजह
पुलिस जांच और कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल पिछले करीब 6 साल से गंभीर सूखे नशे के आदी थे। जब मुस्कान के पति सौरभ राजपूत को इस अवैध रिश्ते और नशे की लत के बारे में पता चला, तो उनके वैवाहिक जीवन में भारी दरार आ गई थी। पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि दोनों के बीच संपत्ति, रुपयों और निजी चैट्स व वीडियो को लेकर ब्लैकमेलिंग का सिलसिला शुरू हो गया था। लगातार बढ़ते मानसिक दबाव और अपनी नशे की दुनिया को उजड़ने से बचाने के लिए मुस्कान ने अपने पति को ही रास्ते से हटाने का क्रूर फैसला कर लिया।
साजिश के तहत पहले दिया नशा, फिर किए शव के टुकड़े
जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरी तरह से एक सुनियोजित हत्याकांड (Well-Planned Murder) था। योजना के तहत 3 मार्च की रात को सौरभ के खाने में नींद की गोलियां मिला दी गईं। जब वह पूरी तरह अचेत हो गया, तो मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल को घर के अंदर एंट्री कराई। दोनों ने पहले चाकू और उस्तरे से वार कर सौरभ की हत्या की, और फिर पकड़े जाने के डर से शव को कई हिस्सों में काट डाला। शातिर आरोपियों ने शव के हिस्सों को एक बड़े प्लास्टिक ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट और कंक्रीट का गाढ़ा घोल भर दिया, ताकि किसी को भनक न लगे और बदबू न आए। योजना यह भी थी कि ड्रम के ऊपर मिट्टी डालकर पौधा लगा दिया जाएगा ताकि वह साधारण गमला दिखाई दे।
जेल में भी नशे के लिए छटपटाहट, बढ़ी निगरानी
मेरठ जेल में बंद दोनों आरोपियों को लेकर जेल प्रशासन ने भी बड़ा खुलासा किया है। हिमाचल प्रदेश के कसौल और मनाली में लगातार भारी नशा करने वाले मुस्कान और साहिल की जेल में हालत बेहद खराब है। अचानक नशा बंद होने के कारण दोनों गंभीर 'विड्रॉल सिम्टम्स' (Withdrawal Symptoms) से जूझ रहे हैं और बैरक के अन्य बंदियों से नशे की गोलियों की मांग कर रहे हैं। इसे देखते हुए जेलर के निर्देश पर दोनों की सुरक्षा और निगरानी को अत्यधिक सख्त कर दिया गया है। जेल के भीतर ही मनोचिकित्सकों द्वारा उनकी विशेष काउंसलिंग और नशा मुक्ति का प्रयास किया जा रहा है।
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