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ध्वस्तीकरण का खौफ : सेंट्रल मार्केट में खुद दुकान खाली कराने लगे मकान मालिक

-सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आवास विकास परिषद को दिया है छह सप्ताह के अंदर अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश 


-इससे पहले भी करीब 200 मकान मालिकों ने खुद ही दुकान बंद कर हटा लिए थे शटर और लगा ली थी दीवार 


मेरठ | शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए सेंट्रल मार्केट अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण आदेश के बाद लोगों ने खुद ही अपनी दुकानों के शटर हटाकर दीवार लगाना शुरू कर दिया है। जिन मकान मालिकों ने अपनी दुकानें किराये पर दे रखी थी उन्होंने भी दुकानों को खाली कराना शुरू कर दिया है, ताकि दुकानों का शटर हटाकर वहां दीवार लगाकर उसे बंद किया जा सके। लोग इसकी जानकारी आवास एवं विकास परिषद को भी दे रहे हैं। परिषद अधिकारियों का कहना है 1478 अवैध निर्माणकर्ताओं में से करीब 200 ने अपने अवैध निर्माण स्वयं हटा लिए हैं। बाकी से भी अवैध निर्माण हटाने को कहा जा रहा है। अगर इन्होंने अवैध निर्माण नहीं हटाए तो परिषद अवैध निर्माणों को ध्वस्त करेगी और उस पर होने वाले खर्च की वसूली की जाएगी। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जद में शास्त्रीनगर स्कीम नंबर 3 और स्कीम नंबर 7 के वो सभी 1478 अवैध व्यावसासिक निर्माण आए हैं जिनकी सूची आवास एवं विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी। स्कीम नंबर 7 में स्थित एमआईजी भवन संख्या 661/6 (331 वर्गमीटर) के ध्वस्तीकरण को बचाने के लिए व्यापारियों ने सुप्रीम कोर्ट में शरण ली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को अपने आदेश में हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए भवन संख्या 661/6 के साथ उस जैसे बाकी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। 

आदेश का अनुपालन करते हुए परिषद ने 25 अक्टूबर 2025 को भवन संख्या 661/6 को ध्वस्त कर दिया लेकिन बाद में कार्रवाई रोक दी थी। इसके खिलाफ आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी को सुनवाई करते हुए परिषद को फटकार लगाते हुए बाकी बचे सभी अवैध निर्माण ध्वस्त करने और 6 सप्ताह के अंदर डिटेल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने के आदेश दिए हैं। इससे खौफ में आए लोगों ने खुद ही अवैध निर्माणों को हटाना शुरू कर दिया है। 


1478 अवैध निर्माणों की सौंपी थी सूची 

आवास एवं विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट में 1478 अवैध निर्माणों की सूची दाखिल की थी। जिसमें सबसे ज्यादा 860 भू-उपयोग परिवर्तन के मामले शास्त्रीनगर स्कीम नंबर 7 में हैं। शास्त्रीनगर स्कीम नंबर 3 में 618 आवासीय भवनों का उपयोग कॉमर्शियल में हो रहा है। परिषद ने इन सभी अवैध निर्माणकर्ताओं को नोटिस दिए हुए हैं। परिषद अधिकारियों ने बताया नोटिस के बाद लोगों ने घर में बनी दुकानों को बंद करना शुरू कर दिया है। लोगों ने दुकान का शटर हटाकर दीवार लगा दी है और इसकी जानकारी परिषद को दी जा रही है। 


सेक्टर 2, 3, 6 और ब्लॉक के-एल में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण 

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल परिषद की सूची में सबसे ज्यादा भू-उपयोग परिवर्तन के मामले स्कीम नंबर 7 के सेक्टर 2 में 293, सेक्टर 3 में 132 और सेक्टर 6 यानि सेंट्रल मार्केट में 99 आवासों को व्यावसायिक कर दिया है। स्कीम नंबर 3 के ब्लॉक के में सर्वाधिक 209 और एल ब्लॉक में 176 आवास कॉमर्शियल हो चुके हैं।

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