वाशिंगटन/तेहरान: महीनों से जारी विनाशकारी अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। वाशिंगटन और तेहरान के राजनयिकों के बीच युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाने और शांति वार्ता शुरू करने को लेकर एक सहमति पत्र (MoU) तैयार हो गया है। हालांकि, इस ऐतिहासिक शांति समझौते को पूरी तरह लागू करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अंतिम आधिकारिक मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
60 दिनों का समझौता: खुलेगा हॉरमुज जलडमरूमध्य
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते के तहत सबसे महत्वपूर्ण कदम हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह 'अबाधित' करना है। ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सभी समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को 30 दिनों के भीतर हटाने पर सहमत हो गया है। इसके अलावा, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से कोई टैक्स या टोल नहीं वसूला जाएगा और न ही उन्हें किसी प्रकार से परेशान किया जाएगा। इसके बदले में, अमेरिका भी 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी सख्त नौसैनिक नाकेबंदी को हटा लेगा।
परमाणु कार्यक्रम पर रोक के बदले मिलेगी आर्थिक राहत
तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, ईरान इस बात के लिए प्रतिबद्ध होगा कि वह परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा। इसके बदले में, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने और विदेशों में फ्रीज (जब्त) पड़े लगभग 12 अरब डॉलर के ईरानी फंड को रिलीज करने पर चर्चा करने के लिए तैयार हुआ है। इस 60 दिनों की अवधि के दौरान दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य और उसके अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम (HEU) के स्टॉक को लेकर गहन बातचीत करेंगे। इसके साथ ही ईरान को मानवीय सहायता और आवश्यक वस्तुएं प्राप्त करने में मदद करने के लिए एक तंत्र बनाने पर भी सहमति बनी है।
ट्रम्प की मंजूरी पर टिकी दुनिया की निगाहें
भले ही दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों ने इस समझौते के अधिकांश नियमों को अंतिम रूप दे दिया हो, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अंतिम हरी झंडी के बिना यह लागू नहीं हो सकता। ट्रम्प ने इस ड्राफ्ट को इजरायल सहित अपने प्रमुख सहयोगी देशों के साथ साझा किया है। इजरायल इस समझौते को लेकर कुछ असहज दिख रहा है, क्योंकि उसका मानना है कि यह समझौता ईरान को बिना किसी कड़े परमाणु वादे के बड़ी आर्थिक राहत दे रहा है। दूसरी ओर, कतर और पाकिस्तान इस पूरी वार्ता में मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहे हैं।
निष्कर्ष: जमीनी हालात अब भी नाजुक
भले ही पर्दे के पीछे शांति की यह बड़ी डील टेबल पर आ चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों देशों के बीच तनाव अब भी चरम पर है। हाल ही में हॉरमुज के पास अमेरिकी हवाई हमलों और उसके जवाब में कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर हुए हमलों ने इस युद्धविराम की संवेदनशीलता को बढ़ा दिया है। अब पूरी दुनिया को इस बात का इंतजार है कि राष्ट्रपति ट्रम्प इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं या मिडिल ईस्ट की यह जंग किसी नए और घातक मोड़ पर पहुंचती है।
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