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सोना हुआ बेहद सस्ता: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोने की कीमतों में ₹2000 से ज्यादा की भारी गिरावट, जानें MCX का ताजा भाव

 


नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों में जारी उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान के बीच नए सिरे से बढ़े तनाव का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को सोने की कीमतों में ₹2000 प्रति 10 ग्राम से ज्यादा की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। इस बड़ी गिरावट के बाद जून में एक्सपायर होने वाला गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,54,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है।

MCX पर औंधे मुंह गिरा सोना: ₹1,53,586 पर आया भाव बकरीद की छुट्टी के कारण पहले सत्र में बाजार बंद रहने के बाद जैसे ही कमोडिटी एक्सचेंज पर ट्रेडिंग दोबारा शुरू हुई, सोने की कीमतों में भारी बिकवाली देखी गई। जून डिलीवरी वाला MCX गोल्ड फ्यूचर्स ₹2,041 या 1.31% की भारी गिरावट के साथ ₹1,53,586 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर सोना (Spot Gold) 1.5% की गिरावट के साथ $4,389.99 प्रति औंस पर आ गया, जो पिछले दो महीनों का इसका सबसे निचला स्तर है।

अमेरिका-ईरान जंग और महंगाई का डर बना बड़ी वजह विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमतों में इस क्रैश का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच फारस की खाड़ी में फिर से शुरू हुई सैन्य झड़पें हैं। इस तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई (Inflation) की चिंताओं को दोबारा हवा दे दी है। ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण केंद्रीय बैंकों (जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। बल्कि अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले महीनों में सख्त मौद्रिक नीति अपनाते हुए ब्याज दरों को और बढ़ाया जा सकता है। उच्च ब्याज दरें सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों के आकर्षण को कम कर देती हैं।

क्या कहते हैं बाजार एक्सपर्ट्स? कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक अब इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी प्रभावित होगी। आमतौर पर युद्ध या भू-राजनीतिक संकट के समय सोने को एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है और इसकी कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि, इस बार बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) का कोई बड़ा संकट नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था भले ही धीमी हो रही है, लेकिन 2008 के वित्तीय संकट या कोविड जैसी स्थिति नहीं है। यही वजह है कि सोने में सुरक्षित निवेश की मांग फिलहाल कमजोर है और कीमतों में सुधार के बजाय बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है।

निष्कर्ष: लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौका? बाजार जानकारों के अनुसार, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते सोने की कीमतों में शॉर्ट-टर्म (कम समय) के लिए यह ठहराव या गिरावट जारी रह सकती है। हालांकि, लंबी अवधि के लिए सोने के बुनियादी आधार अभी भी मजबूत माने जा रहे हैं। खुदरा खरीदारों और निवेशकों के लिए कीमतों में आई यह बड़ी गिरावट खरीदारी का एक अच्छा मौका साबित हो सकती है, बशर्ते वे बाजार की अस्थिरता पर नजर बनाए रखें।

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