- पल्लवपुरम थाने में दर्ज मुकदमे में जांच नहीं बढ़ाई थी आगे, मुकदमे में आरोपी दंपति को फोन पर धमका रहा था दरोगा
मेरठ | पल्लवपुरम थाने में तैनात दरोगा को मुकदमे की विवेचना लटकाना भारी पड़ गया। न तो जांच के दौरान कार्रवाई की और न ही एफआर लगाई गई। आरोपियों को लगातार कॉल कर थाने आने का दबाव बनाया। शिकायत पर एसएसपी ने रिपोर्ट मांगी तो खुलासा हुआ सीओ दौराला की जांच में केस गलत पाया गया था। बावजूद इसके फाइल लटकाने पर दरोगा को एसएसपी ने कार्यालय बुलाया और लाइन भेजने का आदेश कर दिया।
पल्लवपुरम थाने में कुछ माह पूर्व एक मुकदमा दर्ज कराया गया था। दरोगा आलोक मिश्रा को जांच दी गई। मामले में पूर्व में आरोपी दंपति ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की और फर्जी मुकदमा दर्ज किए जाने का आरोप लगाया था। सीओ दौराला से अलग से जांच कराई गई तो उनकी जांच में भी केस गलत पाया गया। ऐसे में मुकदमे को खत्म करने की बात लिखी गई। बावजूद इसके केस में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। न तो एफआर लगाई गई और न ही चार्जशीट लगी थी। मामले में दंपति ने मंगलवार को एसएसपी/डीआईजी डॉ. विपिन ताडा से शिकायत की। आरोप लगाया दरोगा आलोक मिश्रा उन्हें फोन कर थाने आने के लिए कहते हैं और धमकाते हैं। इसके बाद केस डायरी के साथ दरोगा को तलब कर लिया गया। दरोगा से पूछा निस्तारण क्यों नहीं किया गया। यह भी पूछा कि जांच मिलने के बाद से लेकर अभी तक क्या लिखापढ़ी की और क्या तथ्य सामने आए। यह भी पूछा गया कि जांच में केस गलत पाया गया तो एफआर क्यों नहीं लगी? दरोगा से ये भी पूछा कि केस सही है या गलत? इस पर दरोगा ने जवाब दिया कि केस झूठा है। इस पर एसएसपी/डीआईजी डॉ. विपिन ताडा ने फटकार लगाई। तुरंत पेशकार को बुलाकर दरोगा आलोक मिश्रा को लाइन भेजने का आदेश कर दिया।
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