-यूजीसी ने जारी किया नोटिफिकेशन, कहा-नियमों का पालन करना बाध्यकारी
-उल्लंघन पर पाठ्यक्रम चलाने और ओडीएल पर लगाई जा सकती है पाबंदी
मेरठ | धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान, दिव्यांगता के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को खत्म करना प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान की जिम्मेदारी होगी। विशेष रूप से एससी-एसटी, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों के लिए शैक्षिक संस्थानों को काम करना होगा। ऐसा नहीं करने पर यूजीसी संबंधित संस्थान की जांच करेगा। दोषी मिलने पर संबंधित शैक्षिक संस्थान को यूजीसी की योजनाओं से बाहर कर दिया जाएगा। डिग्री पाठ्यक्रम चलाने पर रोक लगा दी जाएगी। इन दोनों कार्रवाई के साथ संस्थानों को ओडीएल एव ऑनलाइन मोड में पाठ्यक्रम चलाने से भी रोका जाएगा। संस्थानों पर एक से ज्यादा कार्रवाई भी की जा सकेगी।
यूजीसी ने देश के उच्च शैक्षिक संस्थानों में समता स्थापित करने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 13 जनवरी को प्रकाशित तिथि से ही उक्त नियम समस्त संस्थानों पर बाध्यकारी होंगे। यूजीसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि विवि मनमानी नहीं कर सकते और भेदभाव खत्म करने को नियमों को पूरी तरह से लागू करना होगा। आदेशों के अनुसार यूजीसी विवि में उच्च शिक्षा के मानकों के समन्वयक एवं निर्धारण करने के लिए सर्वोच्च एवं सशक्त संस्था है। यूजीसी के अनुसार कोई भी संस्थान भेदभाव के किसी भी स्वरूप को ना तो अनुमति देगा और ना ही इसे नजरअंदाज करेगा।
विवि में बनेंगे समान अवसर केंद्र
यूजीसी के अनुसार प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान समान अवसर केंद्र स्थापित करेगा। यह केंद्र वंचित समूह के लिए नीति एवं कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से नजर रखेगा। केंद्र शैक्षणिक, वित्तीय, सामाजिक एवं अन्य मामलों के मार्गदर्शन एवं परामर्श देगा। साथ ही कैंपस में सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करेगा। समान अवसर केंद्र में समता समिति होगी। इस समिति में ओबीसी, दिव्यांगजन, एससी-एसटी, महिलाओं का प्रतनिधित्व होगा।
यह काम करेंगे समान अवसर केंद्र
-संबंधित समुदाय को समता एवं समानता के अवसर उपलब्ध कराना। सामाजिक समावेश लाना।
-छात्र, शिक्षण, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच समता को बढ़ाना। भेदभाव की धारणा खत्म करना।
-वंचित वर्ग से जुड़े छात्र समूहों की सहायता करना।
-भेदभाव की घटना की शिकायत के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाना।
बनेगी समता हेल्पलाइन
प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में समता हेल्पलाइन स्थापित होगी जो 24 घंटे काम करेगी। इस पर संबंधित वर्ग के विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी किसी भी भेदभाव से जुड़ी घटना को दर्ज करा सकेगा। शिकायत पर समता समिति कार्रवाई के लिए 24 घंटे के भीतर बैठक करेगी। समिति 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी जिसकी कॉपी शिकायतकर्ता को भी जाएगी।
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