- विधायक बोले, किसी भी सूरत में बीएसए को जनपद में नहीं रहने दूंगा, शिक्षक-शिक्षिकाओं का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं
मुजफ्फरनगर | जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग अक्सर सुर्खियों में बना रहता है। गत गुरुवार को बुढ़ाना के पूर्व भाजपा विधायक उमेश मलिक बीएसए कार्यालय में पहुंचकर बीएसए पर कार्यप्रणाली को लेकर जमकर भड़के। पूर्व विधायक ने विभाग में शिक्षक-शिक्षिकाओं का मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। बीएसए के स्तर पर एक महिला शिक्षिका को अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं करने का मामला सामने आया है। पूर्व विधायक ने कहा कि बेसिक विभाग में किसी भी शिक्षक-शिक्षिका का मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बीएसए को जनपद में नहीं रहने देने की चेतावनी दी है।
जानकारी के अनुसार एक महिला शिक्षिका रश्मि ने अनुभव प्रमाण के लिए आवेदन किया हुआ है। रश्मि का वर्ष 2021 में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती में सहायक अध्यापक के पद पर चयन हुआ था। बताया जाता है कि कहीं पर काउंसलिंग के लिए उन्हें अपने पुराने शिक्षण अनुभव के सत्यापन की आवश्यकता थी। शिक्षिका का आरोप है कि वह पिछले 10 दिनों से बीएसए कार्यालय में चक्कर काट रही है लेकिन उसे विभागीय नियमों का हवाला देकर अनुभव प्रमाण पत्र अभी तक जारी नहीं किया गया। शिक्षिका ने इसकी शिकायत बुढ़ाना क्षेत्र के पूर्व विधायक उमेश मलिक से की। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने की बात कही है। इस मामले को लेकर गुरुवार को जब पूर्व विधायक उमेश मलिक शिक्षिका की पैरवी लेकर बीएसए कार्यालय पहुंचे, तो वहां बीएसए से तीखी बहस हो गई। इतना ही नहीं अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं करने पर पूर्व विधायक उमेश मलिक बीएसए संदीप कुमार पर जमकर भड़के। इस दौरान किसी ने उनका वीडियो बना लिया और इसे शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में पूर्व विधायक ने बीएसए से कहा कि आपकी मानसिकता खराब है, और खराब मानसिकता के साथ कुर्सी पर बैठकर काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी की सरकार जनता के हित के लिए है, न कि जनता को परेशान करने के लिए। हालांकि हिन्दुस्तान वायरल वीडियों की पुष्टी नहीं करता है।
बीएसए ने आरोपों को नकारा, बोले नियमों के दायरे में होगा काम
इस संबंध में बीएसए संदीप कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारते हुए कहा कि वर्ष 1978 की नियमावली के तहत मान्यता प्राप्त स्कूलों में नियुक्ति के लिए एक तय चयन प्रक्रिया और अनुमोदन अनिवार्य है। शिक्षिका ने वर्ष 2021 की नियुक्ति बताई है, लेकिन हमारे कार्यालय में न तो कोई फाइल पुट अप हुई है और न ही कोई अनुमोदन है। खंड शिक्षा अधिकारी की जांच आख्या के आधार पर ही कार्रवाई की गई है। हमने कोई दबाव नहीं बनाया, बस नियमावली के तहत तथ्य रखे थे।
शिक्षिका बोली, मामले को उलझाया जा रहा
न्यू आर्य कन्या पब्लिक इंटर कालेज मोरना की शिक्षिका रश्मि का कहना है कि जिले में सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं जिनका अनुमोदन नहीं हुआ है, फिर भी उनके मामले में ही यह पेंच फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेरी सरकारी नौकरी लग गई है, बस एक हस्ताक्षर की देरी है। अगर अधिकारी सहयोग नहीं करेंगे तो मेरा भविष्य अधर में लटक जाएगा।
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