-45 किमी में काली नदी में गिरने वाले नाले ड्रोन में हुए कैद, -काली नदी की भूमि का चिन्हांकन करने के बाद रोपे जाएंगे पौधे
-काली नदी के उद्गम स्थल से लेकर कन्नौज तक होगा ड्रोन सर्वे
मेरठ | काली नदी को जीवनदायिनी बनाने के लिए शासन-प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक जिला एक नदी योजना में देश की सर्वाधिक प्रदूषित कही जाने वाली काली नदी को पुनरुद्धार के लिए चयनित किया है। 45 किमी में काली नदी के स्ट्रेच का ड्रोन से सर्वे कराया है। यह सर्वे कन्नौज तक होगा। देखा गया है कि जिलेभर में मुख्य नालों के अलावा कहां छोटी नालियां या नाले से प्रदूषित पानी काली नदी में गिर रहा है।
डीएम डॉ. वीके सिंह एवं नोडल अधिकारी/सीडीओ नुपूर गोयल के निर्देश पर ड्रोन सर्वे जिले में पूरा होने के साथ इसकी रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। जिला गंगा समिति की बैठक में रिपोर्ट को अगले माह रखा जाएगा। इस माह के अंत तक रिपोर्ट तैयार होगी। जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग समेत अन्य विभागों की टीम का गठन काली नदी की भूमि के चिन्हांकन के लिए किया है, ताकि अतिक्रमण को चिह्नित कर हटाया जा सके। नदी के दोनों किनारों पर वन विभाग पौधारोपण करा सके।
यह है तैयारी
शहर के तीन प्रमुख नालों आबूनाला-1, 2 एवं ओडियन नाले से सीवर वेस्टेज काली नदी में गिर रहा है। 72 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जागृति विहार एक्सटेंशन में चल रहा है। 220 एमएलडी क्षमता की एसटीपी कमालपुर में नमामि गंगे अभियान के तहत निर्माणाधीन है। आबूनाला-2 एवं ओडियन नाले के सीवर वेस्टेज को इससे जोड़कर ट्रीटमेंट के बाद काली नदी में छोड़ा जाएगा। गेसूपुर में 65 एमएलडी क्षमता एसटीपी निर्माण की तैयारी है।
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