'राष्ट्रार्पण' संगोष्ठी के साथ ज्ञान की नई लौ
मेरठ: विद्या और अध्यात्म के संगम स्थल, मेरठ स्थित आदि गुरु शंकराचार्य गुरुकुल आश्रम में एक भव्य 'पुस्तकालय' (Library) का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर एक विशेष 'राष्ट्रार्पण' संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों, समाजसेवियों और धर्मगुरुओं ने हिस्सा लिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, वेदों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना है।
ज्ञान के भंडार के रूप में पुस्तकालय का स्वरूप
गुरुकुल परिसर में नवनिर्मित यह पुस्तकालय आधुनिक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत मिश्रण है। यहाँ न केवल दुर्लभ पांडुलिपियाँ और वैदिक साहित्य उपलब्ध हैं, बल्कि समकालीन दार्शनिकों और इतिहासकारों की पुस्तकें भी संकलित की गई हैं। आश्रम के पदाधिकारियों के अनुसार, यह पुस्तकालय न केवल गुरुकुल के विद्यार्थियों के लिए, बल्कि शोधार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए भी खुला रहेगा।
'राष्ट्रार्पण' संगोष्ठी: शिक्षा और राष्ट्रवाद पर मंथन
पुस्तकालय के उद्घाटन के साथ आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने 'राष्ट्रार्पण' के भाव पर जोर दिया। विद्वानों ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने देश की एकता के लिए जो मार्ग दिखाया था, उस पर चलना ही वर्तमान समय की आवश्यकता है। संगोष्ठी में चर्चा की गई कि किस प्रकार गुरुकुल पद्धति और आधुनिक शिक्षा मिलकर एक सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।
समाज और युवाओं को जोड़ने की पहल
आदि गुरु शंकराचार्य गुरुकुल आश्रम लंबे समय से भारतीय संस्कारों और चारित्रिक विकास की दिशा में कार्यरत है। नए पुस्तकालय की स्थापना से क्षेत्रीय युवाओं को अपनी जड़ों को समझने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने पुस्तकालय के लिए दान देने वाले दानदाताओं का आभार व्यक्त किया और इसे समाज के लिए एक अमूल्य निधि बताया।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण
मेरठ में इस प्रकार के बौद्धिक केंद्र की स्थापना को सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और राष्ट्रगान के साथ हुआ। आश्रम प्रबंधन का लक्ष्य है कि भविष्य में यहाँ नियमित रूप से साहित्यिक चर्चाएं और व्याख्यान आयोजित किए जाएं, ताकि ज्ञान की यह धारा अनवरत बहती रहे।
0 टिप्पणियाँ