गाजियाबाद/सहारनपुर: उत्तर रेलवे (Northern Railway) ने वेस्ट यूपी के यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। गाजियाबाद-मेरठ-सहारनपुर रेल मार्ग पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर हासिल कर लिया गया है। इस पूरे रूट पर 'डबल डिस्टेंट सिग्नलिंग' (Double Distant Signaling) प्रणाली को सफलतापूर्वक अपग्रेड कर दिया गया है, जिससे अब इस ट्रैक पर ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटा की टॉप स्पीड से दौड़ सकेंगी।
क्या है 'डबल डिस्टेंट सिग्नलिंग' तकनीक?
यह एक उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली है जो हाई-स्पीड ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए अनिवार्य मानी जाती है।
अतिरिक्त चेतावनी: सामान्य सिग्नलिंग में लोको पायलट को अगले सिग्नल की जानकारी सीमित दूरी से मिलती है। डबल डिस्टेंट प्रणाली में, लोको पायलट को दो सिग्नल पहले ही पता चल जाता है कि आगे का रास्ता कैसा है।
ब्रेकिंग डिस्टेंस: 130 kmph की रफ्तार पर ट्रेन को रोकने के लिए ज्यादा दूरी की आवश्यकता होती है। यह तकनीक लोको पायलट को समय रहते गति नियंत्रित करने में मदद करती है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
इस तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद इस व्यस्त रेल मार्ग पर यात्रा के अनुभव में बड़े बदलाव आएंगे:
समय की बचत: मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों के यात्रा समय में 15 से 30 मिनट तक की कमी आने की उम्मीद है।
वंदे भारत और शताब्दी को मिलेगी गति: वंदे भारत एक्सप्रेस और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों को अब उनकी पूरी क्षमता के साथ चलाया जा सकेगा।
सेक्शन क्षमता में वृद्धि: बेहतर सिग्नलिंग के कारण दो ट्रेनों के बीच का अंतर कम किया जा सकता है, जिससे ट्रैक पर अधिक ट्रेनें चलाने की क्षमता (Section Capacity) बढ़ जाएगी।
ट्रैक और ओएचई का भी हुआ सुदृढ़ीकरण
130 kmph की गति हासिल करने के लिए केवल सिग्नलिंग ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी ढांचों पर भी काम किया गया है:
ट्रैक फिटिंग: भारी वजन वाली पटरियों और आधुनिक स्लीपर्स का उपयोग किया गया है ताकि तेज रफ्तार पर वाइब्रेशन कम हो।
OHE (ओवरहेड इक्विपमेंट): बिजली की लाइनों को भी हाई-स्पीड के अनुकूल मजबूत किया गया है ताकि बिजली आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
सुरक्षा बाड़ (Fencing): गति बढ़ने के कारण दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में ट्रैक के किनारे फेंसिंग का काम भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों का बयान
उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस रूट का सफलतापूर्वक ट्रायल पूरा कर लिया गया है। सीआरएस (CRS) निरीक्षण के बाद जल्द ही ट्रेनों की संशोधित समय सारणी जारी की जाएगी। यह कदम प्रधानमंत्री के 'गतिशक्ति' अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत प्रमुख रेल गलियारों को सेमी-हाई स्पीड के लिए तैयार किया जा रहा है।
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