मेरठ (शास्त्रीनगर): मेरठ के प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट में हाल ही में हुए बुलडोजर एक्शन और दुकानों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ व्यापारियों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने अब इस लड़ाई को देश की राजधानी तक ले जाने का फैसला किया है। इसी क्रम में आज 'दिल्ली पैदल मार्च' का आह्वान किया गया है।
धरने पर बैठी महिलाएं और व्यापारी
पिछले कई दिनों से सेंट्रल मार्केट के व्यापारी कड़ाके की धूप और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद धरने पर डटे हुए हैं।
बुलडोजर कार्रवाई का विरोध: व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त समय दिए और बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के वर्षों पुरानी दुकानों पर बुलडोजर चला दिया, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
महिलाओं का मोर्चा: इस आंदोलन में व्यापारियों के परिवार की महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगी।
दिल्ली कूच: गृहमंत्री से गुहार लगाने की तैयारी
स्थानीय प्रशासन से वार्ता विफल होने के बाद, आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।
पैदल मार्च: योजना के अनुसार, व्यापारी और कार्यकर्ता मेरठ से दिल्ली तक पैदल यात्रा निकालेंगे।
ज्ञापन: इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य नई दिल्ली पहुँचकर केंद्रीय गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपना और अपनी व्यथा सुनाना है। व्यापारियों को उम्मीद है कि केंद्र के हस्तक्षेप से उन्हें कोई राहत मिल सकती है।
पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी
इस पैदल मार्च के ऐलान के बाद मेरठ पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
रोकने की कोशिश: शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों ने व्यापारियों से मार्च टालने की अपील की है, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है ताकि भीड़ को शहर के बाहर जाने से रोका जा सके।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें
व्यापारी संघ ने स्पष्ट किया है कि वे निम्नलिखित मांगों को लेकर अडिग हैं:
तोड़ी गई दुकानों के बदले वैकल्पिक स्थान या उचित मुआवजा दिया जाए।
भविष्य में होने वाली किसी भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।
व्यापारियों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लिया जाए।
सेंट्रल मार्केट का यह विवाद अब मेरठ की सीमाओं से निकलकर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है।
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