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सीलिंग की कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी और महिलाएं; जोरदार प्रदर्शन कर मांगा न्याय

 

मेरठ: महानगर में प्रशासन द्वारा की जा रही सीलिंग की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। शनिवार (11 अप्रैल 2026) को शहर के एक प्रमुख बाजार में व्यापारियों और महिलाओं ने नगर निगम और एमडीए (MDA) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन नियमों की आड़ में भेदभावपूर्ण कार्रवाई कर रहा है, जिससे सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।

क्यों मचा है बवाल?

प्रशासन पिछले कुछ दिनों से अवैध निर्माण और व्यावसायिक अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला रहा है।

  • अचानक सीलिंग: व्यापारियों का कहना है कि बिना पर्याप्त नोटिस दिए दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील किया जा रहा है।

  • महिलाओं का आक्रोश: प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं, जिनका तर्क है कि कई घरों के अगले हिस्से में छोटी दुकानें हैं जो उनके परिवार का एकमात्र आय का स्रोत हैं। उन्हें भी अवैध बताकर बंद किया जा रहा है।

  • भेदभाव का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल छोटे दुकानदारों को निशाना बना रहा है, जबकि बड़े रसूखदार लोगों के अवैध निर्माणों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

बाजार में कामकाज ठप, पुलिस से नोकझोंक

विरोध प्रदर्शन के चलते बाजार की अधिकांश दुकानें बंद रहीं।

  1. धरना-प्रदर्शन: व्यापारी संगठनों ने सड़क पर बैठकर धरना दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।

  2. पुलिस का हस्तक्षेप: भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने जब प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, तो उनके बीच तीखी नोकझोंक हुई। महिलाएं पुलिस के वाहनों के आगे बैठ गईं।

  3. नारेबाजी: प्रशासन के खिलाफ "तानाशाही नहीं चलेगी" और "व्यापारी एकता जिंदाबाद" के नारे लगाए गए।

व्यापारियों की मुख्य मांगें

व्यापारी नेताओं ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी हैं:

  • राहत की मोहलत: सीलिंग की कार्रवाई को तुरंत रोककर व्यापारियों को अपनी बात रखने और दस्तावेज पेश करने का समय दिया जाए।

  • कंपाउंडिंग की सुविधा: जो निर्माण मामूली नियमों के खिलाफ हैं, उन्हें शमन शुल्क (Compounding Fee) लेकर नियमित किया जाए।

  • पुनर्वास: यदि किसी की दुकान पूरी तरह अवैध है, तो उसे वैकल्पिक स्थान मुहैया कराया जाए।

अधिकारियों का पक्ष

नगर निगम और प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेशों और शहर के मास्टर प्लान के अनुसार की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं संपत्तियों को सील किया गया है जिनके पास वैध मानचित्र नहीं थे या जो सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर रही थीं।

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